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खास खबर: जैव विविधता से भरी वर्चुअल वॉक का हिस्सा बन रहे हैं छात्र

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व छात्र इस वक्त आभासी दुनिया से होकर प्राकृतिक खूबसूरती का लुत्फ उठा रहे हैं। साथ ही उन तक पेड़-पौधों व जीव-जंतुओं, इनके बीच की विविधिता और इंसानी जिंदगी के लिए इनकी अहमियत से जुड़ी तमाम जानकारियां पहुंच रही हैं। बीते करीब तीन हफ्ते में चार हजार से ज्यादा छात्र अपनी तरह की अनूठी इस वर्चुअल वाक का हिस्सा बने हैं। आने वाले दिनों में इससे और भी बच्चे जुड़ते जाएंगे।

दरअसल, दिल्ली का यमुना बॉयोडायवर्सिटी पार्क इस वक्त दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों को वर्चुअल वाक करवा रहा है। स्लो मूविंग वीडियो के सहारे पार्क के अलग-अलग हिस्सों की खूबियां, पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं, उनके इको सिस्टम, उनके बीच की विविधिता तक के बारे में जानकारी दी जाती है। वर्चुअल मीडियम से अपने कॉलेज में बैठे बच्चे पार्क की खूबियों का दीदार कर रहे हैं।

पार्क के इंचार्ज डॉ. फैयाज खुदसर का कहना है कि कोरोना काल से पहले बड़ी संख्या में छात्र पार्क का टूर करते थे। लेकिन बीते करीब आठ महीने यह बंद पड़ा है। जबकि पार्क का विकास ही जीव जंतुओं व वनस्पतियों की लुप्त होती प्रजातियों को संरक्षित रखने, पर्यावरण को स्वच्छ रखने के साथ पर्यावरण शिक्षा के लिए किया गया है। कोरोना की बंदिशों की काट हमने वर्चुअल वाक से निकाली। इससे घर या कॉलेज में बैठे 4,272 बच्चों नं न सिर्फ प्रकृति की खूबसूरती का आनंद उठाया है, बल्कि पार्क की नेचर ट्रेल पर चलते हुए वह पर्यावरण शिक्षा भी ले रहे हैं।

इस तरह होती वर्चुअल वाक:
इसमें घर व कॉलेज में बैठे बच्चे वर्चुअल माध्यम से सीधा पार्क से जुड़ जाते हैं। गूगल समेत इसके लिए मौजूद दूसरे प्लेटफार्म से कालेज प्रशासन बच्चों को जोड़ने में मददगार बनता है। बातचीत को जीवंत बनाने के लिए बेहद धीमी गति से चलने वाली फिल्म बनाई गई है। इसमें पार्क के अलग-अलग हिस्सों को फिल्माया गया है। जिस तरह से धीरे-धीरे फिल्म चलती जाती है, उसी तरह के पार्क के विशेषज्ञ संबंधित हिस्से की व्याख्या भी करते जाते हैं। चूंकि चर्चा पार्क से लाइव होती है तो उसमें पक्षियों का कलरव, हवा की गति व पेड़-पौधो की सरसराहट को भी महसूस किया जा सकता है। पूडरी वाक करीब एक घंटे की होती है।

पार्क के अलग-अलग हिस्सों को होता भ्रमण
वर्चुअल वाक में पार्क के जंगलों, घास के मैदान, झील, अलग-अलग प्रजाति के पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों के बीच उसी तरह गुजरती है, जैसे हकीकत में कोई पार्क के बीच से गुजर रहा हो। इस दौरान औषधीय पेड़-पौधों, चिड़ियों व तितिलियों समेत दूसरे जीव जंतुओं के झुंड, उनके इको सिस्टम, बाढ़ क्षेत्र में पाए जाने वाले पेड़ पौधों के जखीरे से होते हुए प्रवासी पक्षियों के अधिवास, नम भूमियों का अध्ययन कराया जाता है।

वर्चुअल वॉक में हिस्सा लेने वालों की राय:
वर्चुअल वॉक का कंटेट बेहद प्रभावी था। हम लोग पहले भी पार्क की रीयल वाक करते थे,  लेकिन कोविड की वजह से यह बंद हो गया है। बीते दो व चार जनवरी की वर्चुअल वाक ने इस कड़ी को फिर जोड़ दिया है। हमारे यहां दो सत्र में करीब 170 बच्चों ने इसमें हिस्सा लिया है। बच्चों की प्रतिक्रिया  काफी उत्साहवर्धक रही है। जिन्होंने अभी तक पार्क नहीं देखा है, वह वहां जाकर समझना चाहते हैं।
डॉ. मयंक पांडेय, असिस्टेंट प्रोफेसर, पर्यावरण अध्ययन केंद्र, पीजी डीएवी कालेज, डीयू

हमने अपने यहां के फर्स्ट ईयर के 98 बच्चों के साथ वर्चुअल वाक में हिस्सा लिया। इसमें प्रिंसपल मधु पृथी भी मौजूद थीं। पूरा सत्र काफी ज्ञानवर्धक था। छात्रों पर इससे बड़ा असर पड़ा है। सत्र के बाद बच्चों का कहना था कि अभी तक वह जो कुछ क्लास में बैठकर पढ़ते थे, उसे नजदीक से देखने का मौका मिला है। उनके सवाल भी काफी अच्छे थे।  आगे बच्चों का फील्ड विजिट भी करवाई जाएगी।
डॉ. गीतांजलि सगीना, केशव महाविद्यालय, डीयू


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arvind007

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