International

क्या चीन गरीब देशों को कर्ज के जाल में नहीं फंसा रहा है?

चीनी के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो)
– फोटो : Facebook

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें

एक नए अध्ययन रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन गरीब देशों को कर्ज के जाल में फंसा कर उनकी संपत्तियां जब्त कर लेता है, हालांकि इस बात के कोई ठोस सबूत नहीं है। इस अध्ययन रिपोर्ट में चीन पर लगातार बढ़ते गए डेट-ट्रैप डिप्लोमेसी (कर्ज जाल कूटनीति) के आरोप का खंडन करने की कोशिश की गई है। खास बात यह है कि ये अध्ययन अमेरिका के हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के चाइना- अफ्रीका रिसर्च इनिशियेटिव (कारी) विभाग में हुआ। कारी की संस्थापक डेबोराह ब्रॉटिगम का कहना है कि डेट ट्रैप की पूरी कहानी निराधार है।  

कारी का दावा है कि उसने चीन से लिए गए कर्ज से संबंधित हजारों दस्तावेजों का अध्ययन किया है। इनमें ज्यादातर कर्ज दस्तावेज अफ्रीका में चलाई गई परियोजनाओं से संबंधित हैं। कारी का कहना है कि उसे इस बात का कोई साक्ष्य नहीं मिला कि जो देश कर्ज नहीं लौटा पाते हैं, चीन उनकी जायदाद जब्त कर लेता है। ये अध्ययन रिपोर्ट उस समय आई है, जब लगभग दर्जन भर अफ्रीकी देश कर्ज के कारण मुसीबत में हैं। अंगोला, इथियोपिया, केन्या और जांबिया सहित कई ऐसे देशों ने कर्ज राहत की मांग की हुई है। चीन ने पिछले दिनों 20 से ज्यादा देशों के लिए कर्ज राहत का एलान किया था। चीन के वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक उसने कई ऐसे ब्याज मुक्त कर्ज को माफ कर दिए हैं, जिनके चुकाने की अवधि 2020 में थी।

हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक डेट ट्रैप का अंदेशा 2017 के बाद से ज्यादा फैला, जब श्रीलंका के हंबनतोता बंदरगाह का स्वामित्व एक चीनी कंपनी के हाथ में चला गया। इसके पहले श्रीलंका इस बंदरगाह से जुड़े कर्ज को लौटाने में नाकाम हो गया था। लेकिन कारी की रिपोर्ट में कहा गया है कि ये बात कहना गलत है कि चीन ने उस बंदरगाह को जब्त कर लिया था।

बल्कि खुद श्रीलंका ने बंदरगाह के 70 फीसदी हिस्से का स्वामित्व एक चीनी कंपनी को दे दिया। श्रीलंका ने चीन के एग्जिम बैंक से इस बंदरगाह के निर्माण के लिए दो किश्तों में कर्ज लिए थे। ये कर्ज 30 करोड़ 70 लाख और 75 करोड़ 70 लाख डॉलर के थे। बंदरगाह बनने के बाद जब वह घाटे में चलने लगा, तो श्रीलंका ने 99 साल के लिए बंदरगाह के बहुसंख्यक शेयर चीनी कंपनी को दे दिए। इसके एवज में उस कंपनी ने श्रीलंका को एक अरब 20 करोड़ डॉलर का भुगतान किया।

कारी के अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने इन तथ्यों की अनदेखी करते हुए हंबनतोता के आधार पर डेट ट्रैप की कहानी फैलाई। इससे अफ्रीका में  भी ये भय फैल गया कि चीन वहां संपत्तियां जब्त कर सकता है। 2018 में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बॉल्टन ने कहा था कि कर्ज ना चुका पाने वाली जाम्बिया की नेशनल पॉवर एंड यूटिलिटी कंपनी को चीन जब्त करने वाला है। ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने कहा कि चीन गरीब देशों को लुभा कर वहां विशाल परियोजनाएं बना रहा है, ताकि जब वे कर्ज ना चुका पाएं, तो उन संपत्तियों को वह जब्त कर ले। इन बातों के कारण कई अफ्रीकी देशों में तेजी से चीन विरोधी भावनाएं फैलीं।

लेकिन अब ब्रॉटिगम का कहना है कि ट्रंप का चीन कार्ड खेलना अमेरिकी चुनाव में एक प्रचार का एक मजबूत मुद्दा साबित हुआ। लेकिन इसका अफ्रीका में ज्यादा असर नहीं हुआ। वहां नई परियोजनाओं के लिए अनेक देश चीन से नए कर्ज लेते रहे। केन्या, जाम्बिया, नाइजीरिया सहित कुल 20 देशों ने 2018 और 2019 में चीन से नए कर्ज के लिए समझौते किए। तंजानिया अफ्रीका का अकेला बड़ा देश है, जिसने चीन से कर्ज नहीं लिया है।

अमेरिका के जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के इलियट स्कूल ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स में प्रोफेसर डेविड शिन ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि डेट ट्रैप डिप्लोमेसी की कहानी शुरू से कमजोर थी, क्योंकि यह बारीकियों को नजरअंदाज करके फैलाई गई थी। शिन के मुताबिक असल सूरत यह है कि आज अफ्रीका के कुल कर्ज में चीन का हिस्सा 20 फीसदी है। ये डेट ट्रैप डिप्लोमेसी नहीं है।

थिंक टैंक सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट में सीनियर फेलॉ और लाइबेरिया के पूर्व लोक निर्माण मंत्री डब्लू ग्लाइड मूर ने भी इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि यह समझना जरूरी है कि आखिर इतने देशों ने चीन से कर्ज क्यों लिया है। इऩ देशों को व्यापारिक, द्विपक्षीय या बहुपक्षीय कर्ज मिलने में दिक्कत आती रही है, जबकि चीन ने आगे बढ़ कर उन्हें कर्ज दिया है। चीन पहले से ही कर्ज के जाल के आरोप का खंडन करता रहा है। उसका दावा रहा है कि चीन ने किसी देश में कोई संपत्ति जब्त नहीं की है। अब ताजा अध्ययन से उसके इस बचाव को बल मिलेगा। उसके लिए सबसे बड़ी बात यह है कि ये अध्ययन अमेरिका में हुआ, जहां से उस पर डेट ट्रैप डिप्लोमेसी के आरोप सबसे ज्यादा लगाए जाते रहे हैं। 

एक नए अध्ययन रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन गरीब देशों को कर्ज के जाल में फंसा कर उनकी संपत्तियां जब्त कर लेता है, हालांकि इस बात के कोई ठोस सबूत नहीं है। इस अध्ययन रिपोर्ट में चीन पर लगातार बढ़ते गए डेट-ट्रैप डिप्लोमेसी (कर्ज जाल कूटनीति) के आरोप का खंडन करने की कोशिश की गई है। खास बात यह है कि ये अध्ययन अमेरिका के हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के चाइना- अफ्रीका रिसर्च इनिशियेटिव (कारी) विभाग में हुआ। कारी की संस्थापक डेबोराह ब्रॉटिगम का कहना है कि डेट ट्रैप की पूरी कहानी निराधार है।  

कारी का दावा है कि उसने चीन से लिए गए कर्ज से संबंधित हजारों दस्तावेजों का अध्ययन किया है। इनमें ज्यादातर कर्ज दस्तावेज अफ्रीका में चलाई गई परियोजनाओं से संबंधित हैं। कारी का कहना है कि उसे इस बात का कोई साक्ष्य नहीं मिला कि जो देश कर्ज नहीं लौटा पाते हैं, चीन उनकी जायदाद जब्त कर लेता है। ये अध्ययन रिपोर्ट उस समय आई है, जब लगभग दर्जन भर अफ्रीकी देश कर्ज के कारण मुसीबत में हैं। अंगोला, इथियोपिया, केन्या और जांबिया सहित कई ऐसे देशों ने कर्ज राहत की मांग की हुई है। चीन ने पिछले दिनों 20 से ज्यादा देशों के लिए कर्ज राहत का एलान किया था। चीन के वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक उसने कई ऐसे ब्याज मुक्त कर्ज को माफ कर दिए हैं, जिनके चुकाने की अवधि 2020 में थी।

हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक डेट ट्रैप का अंदेशा 2017 के बाद से ज्यादा फैला, जब श्रीलंका के हंबनतोता बंदरगाह का स्वामित्व एक चीनी कंपनी के हाथ में चला गया। इसके पहले श्रीलंका इस बंदरगाह से जुड़े कर्ज को लौटाने में नाकाम हो गया था। लेकिन कारी की रिपोर्ट में कहा गया है कि ये बात कहना गलत है कि चीन ने उस बंदरगाह को जब्त कर लिया था।

बल्कि खुद श्रीलंका ने बंदरगाह के 70 फीसदी हिस्से का स्वामित्व एक चीनी कंपनी को दे दिया। श्रीलंका ने चीन के एग्जिम बैंक से इस बंदरगाह के निर्माण के लिए दो किश्तों में कर्ज लिए थे। ये कर्ज 30 करोड़ 70 लाख और 75 करोड़ 70 लाख डॉलर के थे। बंदरगाह बनने के बाद जब वह घाटे में चलने लगा, तो श्रीलंका ने 99 साल के लिए बंदरगाह के बहुसंख्यक शेयर चीनी कंपनी को दे दिए। इसके एवज में उस कंपनी ने श्रीलंका को एक अरब 20 करोड़ डॉलर का भुगतान किया।


आगे पढ़ें

चीन ने डोनाल्ड ट्रंप पर लगाया झूठ फैलाने का आरोप

Source link

arvind007

News Media24 is a Professional News Platform. Here we will provide you National, International, Entertainment News, Gadgets updates, etc. 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
%d bloggers like this: