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क्या अब पूंजीवादी राह पर जाएगा क्यूबा? अर्थव्यवस्था के ज्यादातर क्षेत्रों को निजी क्षेत्र के लिए खोला

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क्यूबा में आर्थिक नीति में लाए गए अहम बदलाव के बाद विश्लेषक ये अनुमान लगा रहे हैं कि क्या लगभग साठ साल तक कम्युनिस्ट रास्ते पर चलने के बाद अब इस लैटिन अमेरिकी देश ने पूंजीवादी नीतियों को अपना लिया है। ज्यादातर जानकार अभी इस बारे में कोई अंतिम राय देने से बच रहे हैं, लेकिन अब यह साफ है कि क्यूबा में निजी क्षेत्र की भूमिका पहले की तुलना में बहुत बढ़ जाएगी। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण पहले से ही आर्थिक मुश्किलें झेल रहे क्यूबा में कोरोना महामारी के कारण संकट और गहरा हो गया। उसके ताजा एलान को उसी का नतीजा माना जा रहा है।

कुछ हफ्ते पहले क्यूबा ने अपनी मुद्रा पेसो का अवमूल्यन किया था। शनिवार को राष्ट्रपति मिगुएल दियाज-कानेल की सरकार ने एलान किया कि वह अब अर्थव्यवस्था के ज्यादातर क्षेत्रों को निजी क्षेत्र के लिए खोल देगी। श्रम मंत्री मार्ता इलीना फिएतो कैब्रेरा ने कहा कि अब सिर्फ 124 क्षेत्र ऐसे रहेंगे, जो पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में रहेंगे। जबकि पहले सिर्फ 127 क्षेत्र ऐसे थे।

क्यूबा को मुद्रास्फीति में तेज बढ़ोतरी की समस्या का सामना कर रहा है। मुद्रास्फीति की दर 1959 में हुई कम्युनिस्ट क्रांति के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। इसे देखते हुए सरकार अब पब्लिक सेक्टर की कुछ कंपनियों की सब्सिडी खत्म करने पर विचार कर रही है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक अगर सब्सिडी के खात्मे के कारण कुछ कंपनियों के दिवालिया होने की स्थिति पैदा हुई, तब भी इस जोखिम को उठाया जाएगा।

लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि मुद्रा का अवमूल्यन और प्राइवेट सेक्टर को छूट देने के फैसले जोखिम भरे हैं। अवमूल्यन के कारण ज्यादातर चीजों और सेवाओं की कीमत बढ़ गई है। इसके खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों से आवाज उठ रही है। हालांकि क्यूबा सरकार ने वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी की है, लेकिन इसका लाभ आबादी के सभी तबकों को नहीं मिलता।

जानकारों का कहना है कि क्यूबा के सामने फौरी समस्या कोरोना वायरस महामारी के कारण खड़ी हुई है। क्यूबा की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर काफी हद तक निर्भर रही है। जबकि महामारी के कारण ये उद्योग ठप हो गया। इस कारण जरूरी आयात के लिए भी विदेशी मुद्रा की कमी हो गई है। 2020 में क्यूबा की अर्थव्यवस्था में 11 फीसदी की गिरावट आई। देश में कई जरूरी चीजों की कमी हो गई है, लेकिन खरीदने के लिए लोगों को हाल में लंबी कतारें लगानी पड़ी हैं।

क्यूबा के अर्थशास्त्री रिकार्डो टोरेस ने ब्रिटिश अखबार द फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि निजी क्षेत्र के लिए अर्थव्यवस्था को खोलने से नौकरियां पैदा होंगी और मुद्रास्फीति पर काबू पाने में मदद मिलेगी। इससे सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में सुधार करने की बेहतर स्थिति में होगी।

क्यूबा की दूसरी बड़ी मुश्किल उस पर लगे अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध हैं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ये प्रतिबंध बहुत सख्त कर दिए थे। अपने आखिरी दिनों में उन्होंने क्यूबा को आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देशों की सूची में डाल दिया। जबकि उसके पहले राष्ट्रपति बराक ओबामा के शासनकाल में अमेरिका और क्यूबा के रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए थे। अब क्यूबा सरकार को आशा है कि जो बाइडेन प्रशासन ओबामा प्रशासन के दौर में अपनाई गई नीतियों को वापस लाएगा। ऐसा हुआ तो उससे क्यूबा को बड़ी राहत मिलेगी।

अमेरिका-क्यूबा ट्रेड एंड इकोनॉमिक काउंसिल के अध्यक्ष जॉन कावुलिच ने एक समाचार एजेंसी से कहा कि क्यूबा अगर मुद्रा विनिमय दर के उदारीकरण और अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र को ज्यादा भूमिका देने की अपनी कोशिश में सफल रहा, तो बाइडेन प्रशासन उससे संबंध को यथाशीघ्र सामान्य बनाने के लिए प्रोत्साहित होगा। विश्लेषकों का कहना है कि क्यूबा फिलहाल गहरे आर्थिक संकट में है, जिससे उबरने के लिए उसने महत्वपूर्ण पहल की है। इसमें वह कामयाब होता है या नहीं, यह बहुत से दूसरे पहलुओं पर भी निर्भर करता है।

सार

क्यूबा को मुद्रास्फीति में तेज बढ़ोतरी की समस्या का सामना कर रहा है। मुद्रास्फीति की दर 1959 में हुई कम्युनिस्ट क्रांति के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। इसे देखते हुए सरकार अब पब्लिक सेक्टर की कुछ कंपनियों की सब्सिडी खत्म करने पर विचार कर रही है…

विस्तार

क्यूबा में आर्थिक नीति में लाए गए अहम बदलाव के बाद विश्लेषक ये अनुमान लगा रहे हैं कि क्या लगभग साठ साल तक कम्युनिस्ट रास्ते पर चलने के बाद अब इस लैटिन अमेरिकी देश ने पूंजीवादी नीतियों को अपना लिया है। ज्यादातर जानकार अभी इस बारे में कोई अंतिम राय देने से बच रहे हैं, लेकिन अब यह साफ है कि क्यूबा में निजी क्षेत्र की भूमिका पहले की तुलना में बहुत बढ़ जाएगी। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण पहले से ही आर्थिक मुश्किलें झेल रहे क्यूबा में कोरोना महामारी के कारण संकट और गहरा हो गया। उसके ताजा एलान को उसी का नतीजा माना जा रहा है।

कुछ हफ्ते पहले क्यूबा ने अपनी मुद्रा पेसो का अवमूल्यन किया था। शनिवार को राष्ट्रपति मिगुएल दियाज-कानेल की सरकार ने एलान किया कि वह अब अर्थव्यवस्था के ज्यादातर क्षेत्रों को निजी क्षेत्र के लिए खोल देगी। श्रम मंत्री मार्ता इलीना फिएतो कैब्रेरा ने कहा कि अब सिर्फ 124 क्षेत्र ऐसे रहेंगे, जो पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में रहेंगे। जबकि पहले सिर्फ 127 क्षेत्र ऐसे थे।

क्यूबा को मुद्रास्फीति में तेज बढ़ोतरी की समस्या का सामना कर रहा है। मुद्रास्फीति की दर 1959 में हुई कम्युनिस्ट क्रांति के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। इसे देखते हुए सरकार अब पब्लिक सेक्टर की कुछ कंपनियों की सब्सिडी खत्म करने पर विचार कर रही है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक अगर सब्सिडी के खात्मे के कारण कुछ कंपनियों के दिवालिया होने की स्थिति पैदा हुई, तब भी इस जोखिम को उठाया जाएगा।

लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि मुद्रा का अवमूल्यन और प्राइवेट सेक्टर को छूट देने के फैसले जोखिम भरे हैं। अवमूल्यन के कारण ज्यादातर चीजों और सेवाओं की कीमत बढ़ गई है। इसके खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों से आवाज उठ रही है। हालांकि क्यूबा सरकार ने वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी की है, लेकिन इसका लाभ आबादी के सभी तबकों को नहीं मिलता।

जानकारों का कहना है कि क्यूबा के सामने फौरी समस्या कोरोना वायरस महामारी के कारण खड़ी हुई है। क्यूबा की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर काफी हद तक निर्भर रही है। जबकि महामारी के कारण ये उद्योग ठप हो गया। इस कारण जरूरी आयात के लिए भी विदेशी मुद्रा की कमी हो गई है। 2020 में क्यूबा की अर्थव्यवस्था में 11 फीसदी की गिरावट आई। देश में कई जरूरी चीजों की कमी हो गई है, लेकिन खरीदने के लिए लोगों को हाल में लंबी कतारें लगानी पड़ी हैं।

क्यूबा के अर्थशास्त्री रिकार्डो टोरेस ने ब्रिटिश अखबार द फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि निजी क्षेत्र के लिए अर्थव्यवस्था को खोलने से नौकरियां पैदा होंगी और मुद्रास्फीति पर काबू पाने में मदद मिलेगी। इससे सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में सुधार करने की बेहतर स्थिति में होगी।

क्यूबा की दूसरी बड़ी मुश्किल उस पर लगे अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध हैं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ये प्रतिबंध बहुत सख्त कर दिए थे। अपने आखिरी दिनों में उन्होंने क्यूबा को आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देशों की सूची में डाल दिया। जबकि उसके पहले राष्ट्रपति बराक ओबामा के शासनकाल में अमेरिका और क्यूबा के रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए थे। अब क्यूबा सरकार को आशा है कि जो बाइडेन प्रशासन ओबामा प्रशासन के दौर में अपनाई गई नीतियों को वापस लाएगा। ऐसा हुआ तो उससे क्यूबा को बड़ी राहत मिलेगी।

अमेरिका-क्यूबा ट्रेड एंड इकोनॉमिक काउंसिल के अध्यक्ष जॉन कावुलिच ने एक समाचार एजेंसी से कहा कि क्यूबा अगर मुद्रा विनिमय दर के उदारीकरण और अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र को ज्यादा भूमिका देने की अपनी कोशिश में सफल रहा, तो बाइडेन प्रशासन उससे संबंध को यथाशीघ्र सामान्य बनाने के लिए प्रोत्साहित होगा। विश्लेषकों का कहना है कि क्यूबा फिलहाल गहरे आर्थिक संकट में है, जिससे उबरने के लिए उसने महत्वपूर्ण पहल की है। इसमें वह कामयाब होता है या नहीं, यह बहुत से दूसरे पहलुओं पर भी निर्भर करता है।

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