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कोसोवो के चुनाव में उग्र-राष्ट्रवादी नेता के जीतने का अनुमान

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कोसोवो के 14 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले जनमत सर्वेक्षणों में एल्बिन कुर्ती की पार्टी को सबसे आगे बताया गया है। 45 कुर्ती वही नेता हैं, जिन्होंने संसद भवन में गैस सिलिंडर का विस्फोट करने की कोशिश की थी। इस मामले में उन्हें 2018 में सजा सुनाई गई थी। लेकिन कोसोवो के चुनाव कानून के मुताबिक सजा के बावजूद कोई नेता चुनाव लड़ सकता है और किसी राजनीतिक पद पर आसीन हो सकता है। इसलिए जनमत सर्वेक्षणों के अनुमान के मुताबिक अगर कुर्ती की पार्टी- वेतेवेनदोसये (आत्म-संकल्प) जीती, तो कुर्ती प्रधानमंत्री बन सकते हैं। जनमत सर्वेक्षणों में वेतेवेनदोसये को 40 से 50 फीसदी तक वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है।

वैसे यह पहला मौका नहीं होगा, जब कुर्ती प्रधानमंत्री बनेंगे। 2019 में वेतेवेनदोसये पार्टी ने डेमोक्रेटिक लीग ऑफ कोसोवो (एलडीके) के साथ गठबंधन बनाया था। तब वे प्रधानमंत्री बने थे। लेकिन कोविड-19 महामारी आने पर सरकार पर खराब प्रदर्शन का आरोप लगाते हुए एलडीके ने समर्थन वापस ले लिया। उसके बाद एलडीके के नेता अवदुल्ला होती ने दूसरे दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई, लेकिन वह पिछले दिसंबर में गिर गई। इसलिए अब नया चुनाव हो रहा है।

कोसोवो के स्वतंत्र देश बनने का इतिहास खून-खराबे से भरा रहा। कोसोवो पूर्व यूगोस्लाविया का हिस्सा था। 1990 के दशक में यूगोस्लाविया के विखंडन के बाद यह सर्बिया का हिस्सा बना। लेकिन कोसोवो के लोग आजादी के लिए लड़ते रहे। 2008 में कोसोवो ने अपनी आजादी का एलान कर दिया। अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप से जब आजादी मिली, तो सर्ब समुदाय की बहुसंख्या वाले इलाकों को स्वायत्तता देने की शर्त के साथ मिली। इसी स्वायत्तता का विरोध करते हुए 2015 में वेतेवेनदोसये का उदय एक आंदोलन के रूप में हुआ। गौरतलब है कि सर्बिया ने अभी तक कोसोवो को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता नही दी है। सर्बिया की पीठ पर रूस का हाथ है। इसलिए अभी तक कोसोवो को संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता नहीं मिल सकी है। इसके प्रस्ताव को रूस ने वीटो कर रखा है।

यूरोपियन यूनियन (ईयू) के 27 में 22 देशों ने कोसोवो को मान्यता दे रखी है। अमेरिका ने भी कोसोवो को मान्यता दी हुई है। इसके बावजूद कोसोवो के लोगों में ये शिकायत गहराती गई है कि ईयू या अमेरिका ने कोसोवो को दिल से मदद नहीं की है। ईयू ने अल्बानिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, उत्तर मेसिडोनिया, मोंटेनेगरो और सर्बिया के लोगों को बिना वीजा के अपने क्षेत्र में यात्रा की सुविधा दी है, लेकिन ये सुविधा कोसोवो को नहीं मिली है।

कुर्ती ने इन सब बातों को मुद्दा बनाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यूरोप ने कोसोवो को भुला दिया है, जबकि कोसोवो ने वह सब कुछ किया, जो ईयू ने उसे करने को कहा। कुर्ती की इन बातों को देश में भारी समर्थन मिला है। विश्लेषकों के मुताबिक कुर्ती की रणनीति यह संदेश लोगों के मन में उतारना है कि कोसोवो के लोगों को अपना ख्याल खुद रखना होगा। उन्हें अंतरराष्ट्रीय मदद की आस छोड़ कर अपनी क्षमताओं पर भरोसा करना होगा। देश के युवाओं में इस संदेश का गहरा असर हुआ है। 18 लाख की आबादी वाले इस देश में 40 फीसदी से भी अधिक लोगों की उम्र 25 साल से कम है।

कुर्ती कोसोवन लिबरेशन आर्मी में शामिल थे, जिसने सर्बिया के खिलाफ आजादी की हथियारबंद लड़ाई लड़ी थी। यह भी युवाओं में उनकी लोकप्रियता का कारण है। कुर्ती ने बाकी दलों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने झुकने का आरोप लगाया है। वे ईयू की मध्यस्थता में सर्बिया के साथ चल रही वार्ता में किसी तरह की रियायत देने के विरोधी हैं।

चुनाव अभियान में उन्होंने कहा है कि दूसरी पार्टियां ईयू के दबाव में झुक कर सर्बिया से मान्यता के लिए उसकी शर्तों को मान सकती हैं। यह उग्र राष्ट्रवाद चुनाव में कारगर रणनीति साबित हुआ है। कोसोवो की संसद में 120 सदस्य हैं। यानी बहुमत पाने के लिए 61 सदस्यों की जरूरत होती है। अनुमान है कि इतना समर्थन वेतेवेनदोसये को हासिल हो जाएगा।

सार

कोसोवो के स्वतंत्र देश बनने का इतिहास खून-खराबे से भरा रहा। कोसोवो पूर्व यूगोस्लाविया का हिस्सा था। 1990 के दशक में यूगोस्लाविया के विखंडन के बाद यह सर्बिया का हिस्सा बना। लेकिन कोसोवो के लोग आजादी के लिए लड़ते रहे…

विस्तार

कोसोवो के 14 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले जनमत सर्वेक्षणों में एल्बिन कुर्ती की पार्टी को सबसे आगे बताया गया है। 45 कुर्ती वही नेता हैं, जिन्होंने संसद भवन में गैस सिलिंडर का विस्फोट करने की कोशिश की थी। इस मामले में उन्हें 2018 में सजा सुनाई गई थी। लेकिन कोसोवो के चुनाव कानून के मुताबिक सजा के बावजूद कोई नेता चुनाव लड़ सकता है और किसी राजनीतिक पद पर आसीन हो सकता है। इसलिए जनमत सर्वेक्षणों के अनुमान के मुताबिक अगर कुर्ती की पार्टी- वेतेवेनदोसये (आत्म-संकल्प) जीती, तो कुर्ती प्रधानमंत्री बन सकते हैं। जनमत सर्वेक्षणों में वेतेवेनदोसये को 40 से 50 फीसदी तक वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है।

वैसे यह पहला मौका नहीं होगा, जब कुर्ती प्रधानमंत्री बनेंगे। 2019 में वेतेवेनदोसये पार्टी ने डेमोक्रेटिक लीग ऑफ कोसोवो (एलडीके) के साथ गठबंधन बनाया था। तब वे प्रधानमंत्री बने थे। लेकिन कोविड-19 महामारी आने पर सरकार पर खराब प्रदर्शन का आरोप लगाते हुए एलडीके ने समर्थन वापस ले लिया। उसके बाद एलडीके के नेता अवदुल्ला होती ने दूसरे दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई, लेकिन वह पिछले दिसंबर में गिर गई। इसलिए अब नया चुनाव हो रहा है।

कोसोवो के स्वतंत्र देश बनने का इतिहास खून-खराबे से भरा रहा। कोसोवो पूर्व यूगोस्लाविया का हिस्सा था। 1990 के दशक में यूगोस्लाविया के विखंडन के बाद यह सर्बिया का हिस्सा बना। लेकिन कोसोवो के लोग आजादी के लिए लड़ते रहे। 2008 में कोसोवो ने अपनी आजादी का एलान कर दिया। अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप से जब आजादी मिली, तो सर्ब समुदाय की बहुसंख्या वाले इलाकों को स्वायत्तता देने की शर्त के साथ मिली। इसी स्वायत्तता का विरोध करते हुए 2015 में वेतेवेनदोसये का उदय एक आंदोलन के रूप में हुआ। गौरतलब है कि सर्बिया ने अभी तक कोसोवो को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता नही दी है। सर्बिया की पीठ पर रूस का हाथ है। इसलिए अभी तक कोसोवो को संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता नहीं मिल सकी है। इसके प्रस्ताव को रूस ने वीटो कर रखा है।

यूरोपियन यूनियन (ईयू) के 27 में 22 देशों ने कोसोवो को मान्यता दे रखी है। अमेरिका ने भी कोसोवो को मान्यता दी हुई है। इसके बावजूद कोसोवो के लोगों में ये शिकायत गहराती गई है कि ईयू या अमेरिका ने कोसोवो को दिल से मदद नहीं की है। ईयू ने अल्बानिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, उत्तर मेसिडोनिया, मोंटेनेगरो और सर्बिया के लोगों को बिना वीजा के अपने क्षेत्र में यात्रा की सुविधा दी है, लेकिन ये सुविधा कोसोवो को नहीं मिली है।

कुर्ती ने इन सब बातों को मुद्दा बनाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यूरोप ने कोसोवो को भुला दिया है, जबकि कोसोवो ने वह सब कुछ किया, जो ईयू ने उसे करने को कहा। कुर्ती की इन बातों को देश में भारी समर्थन मिला है। विश्लेषकों के मुताबिक कुर्ती की रणनीति यह संदेश लोगों के मन में उतारना है कि कोसोवो के लोगों को अपना ख्याल खुद रखना होगा। उन्हें अंतरराष्ट्रीय मदद की आस छोड़ कर अपनी क्षमताओं पर भरोसा करना होगा। देश के युवाओं में इस संदेश का गहरा असर हुआ है। 18 लाख की आबादी वाले इस देश में 40 फीसदी से भी अधिक लोगों की उम्र 25 साल से कम है।

कुर्ती कोसोवन लिबरेशन आर्मी में शामिल थे, जिसने सर्बिया के खिलाफ आजादी की हथियारबंद लड़ाई लड़ी थी। यह भी युवाओं में उनकी लोकप्रियता का कारण है। कुर्ती ने बाकी दलों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने झुकने का आरोप लगाया है। वे ईयू की मध्यस्थता में सर्बिया के साथ चल रही वार्ता में किसी तरह की रियायत देने के विरोधी हैं।

चुनाव अभियान में उन्होंने कहा है कि दूसरी पार्टियां ईयू के दबाव में झुक कर सर्बिया से मान्यता के लिए उसकी शर्तों को मान सकती हैं। यह उग्र राष्ट्रवाद चुनाव में कारगर रणनीति साबित हुआ है। कोसोवो की संसद में 120 सदस्य हैं। यानी बहुमत पाने के लिए 61 सदस्यों की जरूरत होती है। अनुमान है कि इतना समर्थन वेतेवेनदोसये को हासिल हो जाएगा।

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