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कोरोना वैक्सीन: 28 दिन बाद लगेगी दूसरी डोज, शरीर लड़ाई के लिए होगा तैयार

न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वॉशिंगटन
Updated Wed, 06 Jan 2021 08:16 AM IST

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भारत सरकार द्वारा जिस स्वदेशी टीका कोवाक्सिन को अनुमति दी गई है उसे कोरोना वायरस के सैंपल से तैयार किया गया है। वायरस का को देश के पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी में आइसोलेट किया गया, जिसके बाद इसका प्रयोग कोवाक्सिन को बनाने में किया गया है।

कुछ इस तरह से काम करेगी स्वदेशी वैक्सीन कोवाक्सिन
यह वैक्सीन भी इम्यून सिस्टम को वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज बनाने के लिए प्रशिक्षित करेगी। वैज्ञानिकों के अनुसार, कोवाक्सिन की पहली डोज के बाद दूसरी डोज 28 दिन के बाद लगनी है। आइए जानते हैं कैसे तैयार हुई है ये स्वदेशी वैक्सीन।

तैयार किया गया वायरस का स्टॉक 
वैज्ञानिकों ने इस वैक्सीन को बनाने के लिए सबसे पहले बड़े पैमाने पर वायरस का स्टॉक तैयार किया। इसके बाद इसे एक केमिकल जिसे बीटा प्रोपियोलैक्टोन कहते हैं, उसके साथ मिला दिया। यह दोनों जब आपस में मिल जाते हैं तो वायरस के जींस प्रभावित होते हैं। इस कारण वायरस अपनी संख्या को बढ़ा नहीं पाता है और कुछ समय में खत्म हो जाता है।

कोराना के निष्क्रिय वायरस से तैयार हुई वैक्सीन
वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया के बाद निष्क्रिय हो चुके वायरस को अलग करने के बाद एल्युमीनियम आधारित कंपाउंड में मिलाया जिसे एडजुवेंट कहते हैं। एडजुवेंट रोग इम्यूनिटी को वैक्सीन के असरदार करने के लिए तैयार करता है। वैक्सीन को तैयार करने में निष्क्रिय वायरस का प्रयोग होता रहा है। 1950 के दशक में वैज्ञानिक जोनास साल्क ने पोलियो वैक्सीन के लिए ऐसा प्रयोग किया था। रैबीज और हेपेटाइटिस की वैक्सीन भी इसी तरह तैयार हुई थी।

टीका लगने से संक्रमण का कोई भी खतरा नहीं
कोवाक्सिन को मृत कोरोना वायरस की मदद से तैयार किया गया है। हाथों में इंजेक्शन के जरिए इसे सीधे पहुंचाया जा सकता है और इससे संक्रमण का कोई खतरा नहीं होता है। टीका जब असर करेगा तो शरीर के भीतर मौजूद थी कोशिका सक्रिय हो जाएगी। दूसरे रोग प्रतिरोधक तंत्रों की मदद से वैक्सीन को और अधिक असरदार बनाने का काम शुरू कर देगी। वैक्सीन स्पाइक प्रोटीन को पहचानने के बाद उसके खिलाफ तेजी से काम शुरू कर सकती है।

एंटीबॉडीज बनना शुरू होगी
शरीर में मौजूद कोशिका निष्क्रिय वायरस के खिलाफ सक्रिय हो जाएगी और कोरोना वायरस को पूरी तरह से जकड़ लेगी। इसके बाद कोशिका भी वायरस के स्पाई प्रोटीन पर हमला बोल देगी। इसके बाद भी कोशिका तेजी से सक्रिय होकर वायरस के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडीज बनाना शुरू कर देगी। इससे वायरस शरीर के भीतर प्रवेश भी कर जाता है तो वह किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा क्योंकि शरीर उसका सामना करने के लिए तैयार होगा।
 

भारत सरकार द्वारा जिस स्वदेशी टीका कोवाक्सिन को अनुमति दी गई है उसे कोरोना वायरस के सैंपल से तैयार किया गया है। वायरस का को देश के पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी में आइसोलेट किया गया, जिसके बाद इसका प्रयोग कोवाक्सिन को बनाने में किया गया है।

कुछ इस तरह से काम करेगी स्वदेशी वैक्सीन कोवाक्सिन

यह वैक्सीन भी इम्यून सिस्टम को वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज बनाने के लिए प्रशिक्षित करेगी। वैज्ञानिकों के अनुसार, कोवाक्सिन की पहली डोज के बाद दूसरी डोज 28 दिन के बाद लगनी है। आइए जानते हैं कैसे तैयार हुई है ये स्वदेशी वैक्सीन।

तैयार किया गया वायरस का स्टॉक 

वैज्ञानिकों ने इस वैक्सीन को बनाने के लिए सबसे पहले बड़े पैमाने पर वायरस का स्टॉक तैयार किया। इसके बाद इसे एक केमिकल जिसे बीटा प्रोपियोलैक्टोन कहते हैं, उसके साथ मिला दिया। यह दोनों जब आपस में मिल जाते हैं तो वायरस के जींस प्रभावित होते हैं। इस कारण वायरस अपनी संख्या को बढ़ा नहीं पाता है और कुछ समय में खत्म हो जाता है।

कोराना के निष्क्रिय वायरस से तैयार हुई वैक्सीन

वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया के बाद निष्क्रिय हो चुके वायरस को अलग करने के बाद एल्युमीनियम आधारित कंपाउंड में मिलाया जिसे एडजुवेंट कहते हैं। एडजुवेंट रोग इम्यूनिटी को वैक्सीन के असरदार करने के लिए तैयार करता है। वैक्सीन को तैयार करने में निष्क्रिय वायरस का प्रयोग होता रहा है। 1950 के दशक में वैज्ञानिक जोनास साल्क ने पोलियो वैक्सीन के लिए ऐसा प्रयोग किया था। रैबीज और हेपेटाइटिस की वैक्सीन भी इसी तरह तैयार हुई थी।

टीका लगने से संक्रमण का कोई भी खतरा नहीं

कोवाक्सिन को मृत कोरोना वायरस की मदद से तैयार किया गया है। हाथों में इंजेक्शन के जरिए इसे सीधे पहुंचाया जा सकता है और इससे संक्रमण का कोई खतरा नहीं होता है। टीका जब असर करेगा तो शरीर के भीतर मौजूद थी कोशिका सक्रिय हो जाएगी। दूसरे रोग प्रतिरोधक तंत्रों की मदद से वैक्सीन को और अधिक असरदार बनाने का काम शुरू कर देगी। वैक्सीन स्पाइक प्रोटीन को पहचानने के बाद उसके खिलाफ तेजी से काम शुरू कर सकती है।

एंटीबॉडीज बनना शुरू होगी

शरीर में मौजूद कोशिका निष्क्रिय वायरस के खिलाफ सक्रिय हो जाएगी और कोरोना वायरस को पूरी तरह से जकड़ लेगी। इसके बाद कोशिका भी वायरस के स्पाई प्रोटीन पर हमला बोल देगी। इसके बाद भी कोशिका तेजी से सक्रिय होकर वायरस के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडीज बनाना शुरू कर देगी। इससे वायरस शरीर के भीतर प्रवेश भी कर जाता है तो वह किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा क्योंकि शरीर उसका सामना करने के लिए तैयार होगा।

 


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arvind007

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