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कोरोना वैक्सीन के आने का प्रभाव, 69 फीसदी अभिभावक बच्चों को भेजना चाहते हैं स्कूल

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Mon, 04 Jan 2021 06:07 AM IST

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कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन से पहले से स्कूल बंद हैं। वैक्सीन आने की अच्छी खबर के साथ कुछ राज्यों ने स्कूलों को फिर से खोलने पर विचार करना शु्रू कर दिया है। ऐसे में अब अभिभावक भी कोरोना संक्रमण के घटते मामलों को देखते हुए अप्रैल से बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में हैं। भारत में लोकल सर्किल के एक ऑनलाइन सर्वे में यह बात सामने आई है कि 69 फीसदी अभिभावक अप्रैल 2021 या उसके बाद से बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं।
 
तीन महीने पहले महज 34 फीसदी ही स्कूल भेजने केपक्ष में थे
तीन माह पहले हुए सर्वे में महज 34 फीसदी अभिभावक ही बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में थे। वर्तमान में कोविड-19 के घटते हुए संक्रमण को देखते हुए अभिभावकों से सवाल किया गया कि वह भारत में स्कूलों को फिर से खोलने केसंबंध में क्या सोचते हैं। इस सवाल पर 8, 695 अभिभावकों से प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं।

69 फीसदी पैरेंट्स अप्रैल से बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं
विशेष रूप से 69 फीसदी माता-पिता ने कहा कि कोविड-19 के वर्तमान रुझान और स्थिति को देखते हुए भारत के स्कूलों को अप्रैल 2021 या उसके बाद से शुरू करना चाहिए। इसके अलावा 23 फीसदी ने कहा कि स्कूलों को जनवरी से शुरू होना चाहिए।

लोकल सर्कल्स के बीते सितंबर में किए गए सर्वे में 34 फीसदी माता.पिता ने कहा था कि सरकार को अगले शैक्षणिक वर्ष में अप्रैल 2021 को ही स्कूल खोलने पर विचार करना चाहिए। अब नए सर्वे से पता चलता है कि उन अभिभावकों का प्रतिशत जो स्कूलों अप्रैल से खोलना चाहते हैं, वह बीते तीन माह में दोगुना हो गया है। 

कम्युनिटी सोश्ल मीडिया प्लेटफॉर्म लोकल सर्किल ने कराया सर्वे
सर्वे में अभिभावकों से सवाल किया गया कि यदि अप्रैल 2021 तक स्कूल बच्चों के लिए कोविड-19 टीका उपलब्ध कराया जाता है तो क्या वह अपने बच्चों को इसे देने पर विचार करेंगे। इस सवाल के जवाब में 26 फीसदी अभिभावकों ने कहा कि अप्रैल तक टीका उपलब्ध कराया जाता है तो वह इसे अपने बच्चों को देने की मंजूरी देंगे।

जबकि 56 फीसदी अभिभावकों ने कहा कि वह निष्कर्षों केआधार पर तीन महीने या उससे अधिक की प्रतीक्षा करेंगे। सर्वे में यह भी सामने आया कि शिक्षा के क्षेत्र को हमेशा केलिए बंद नहीं रख सकते, लेकिन बच्चों की सुरक्षा एक बड़ी प्राथमिकता है। इस सर्वे में देश के 224 जिलों में स्थित 19,000 से अधिक माता-पिता की प्रतिक्रियाएं मिली।  

कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन से पहले से स्कूल बंद हैं। वैक्सीन आने की अच्छी खबर के साथ कुछ राज्यों ने स्कूलों को फिर से खोलने पर विचार करना शु्रू कर दिया है। ऐसे में अब अभिभावक भी कोरोना संक्रमण के घटते मामलों को देखते हुए अप्रैल से बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में हैं। भारत में लोकल सर्किल के एक ऑनलाइन सर्वे में यह बात सामने आई है कि 69 फीसदी अभिभावक अप्रैल 2021 या उसके बाद से बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं।

 

तीन महीने पहले महज 34 फीसदी ही स्कूल भेजने केपक्ष में थे

तीन माह पहले हुए सर्वे में महज 34 फीसदी अभिभावक ही बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में थे। वर्तमान में कोविड-19 के घटते हुए संक्रमण को देखते हुए अभिभावकों से सवाल किया गया कि वह भारत में स्कूलों को फिर से खोलने केसंबंध में क्या सोचते हैं। इस सवाल पर 8, 695 अभिभावकों से प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं।

69 फीसदी पैरेंट्स अप्रैल से बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं

विशेष रूप से 69 फीसदी माता-पिता ने कहा कि कोविड-19 के वर्तमान रुझान और स्थिति को देखते हुए भारत के स्कूलों को अप्रैल 2021 या उसके बाद से शुरू करना चाहिए। इसके अलावा 23 फीसदी ने कहा कि स्कूलों को जनवरी से शुरू होना चाहिए।

लोकल सर्कल्स के बीते सितंबर में किए गए सर्वे में 34 फीसदी माता.पिता ने कहा था कि सरकार को अगले शैक्षणिक वर्ष में अप्रैल 2021 को ही स्कूल खोलने पर विचार करना चाहिए। अब नए सर्वे से पता चलता है कि उन अभिभावकों का प्रतिशत जो स्कूलों अप्रैल से खोलना चाहते हैं, वह बीते तीन माह में दोगुना हो गया है। 

कम्युनिटी सोश्ल मीडिया प्लेटफॉर्म लोकल सर्किल ने कराया सर्वे

सर्वे में अभिभावकों से सवाल किया गया कि यदि अप्रैल 2021 तक स्कूल बच्चों के लिए कोविड-19 टीका उपलब्ध कराया जाता है तो क्या वह अपने बच्चों को इसे देने पर विचार करेंगे। इस सवाल के जवाब में 26 फीसदी अभिभावकों ने कहा कि अप्रैल तक टीका उपलब्ध कराया जाता है तो वह इसे अपने बच्चों को देने की मंजूरी देंगे।

जबकि 56 फीसदी अभिभावकों ने कहा कि वह निष्कर्षों केआधार पर तीन महीने या उससे अधिक की प्रतीक्षा करेंगे। सर्वे में यह भी सामने आया कि शिक्षा के क्षेत्र को हमेशा केलिए बंद नहीं रख सकते, लेकिन बच्चों की सुरक्षा एक बड़ी प्राथमिकता है। इस सर्वे में देश के 224 जिलों में स्थित 19,000 से अधिक माता-पिता की प्रतिक्रियाएं मिली।  


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arvind007

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