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कोरोना : राजकोट के मंदिर में लगा सेंसरयुक्त घंटा, 2-20 सेंटीमीटर की दूरी पर हाथ रखने से खुद बजेगा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजकोट
Updated Sat, 16 Jan 2021 12:08 PM IST

मंदिर का घंटा (सांकेतिक तस्वीर)
– फोटो : social media

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आज से देशव्यापी कोरोना वैक्सीनेशन कार्यक्रम शुरू हो चुका है और देश में कुल 3,006 केंद्रों पर स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन लगनी शुरू हो गई है। ये एक तरह से कोरोना को हराने में महत्वपूर्ण कदम है। वहीं देश में कोरोना को हराने के लिए दूसरे कदम भी उठाए जा रहे हैं। हाल ही में गुजरात के राजकोट में एक मंदिर में सेंसरयुक्त घंटा लगाया गया है।

राजकोट के विश्वकर्मा मंदिर में प्रशासन की ओर से सेंसरयुक्त घंटा लगाया गया है। जो बिना किसी स्पर्श के बज जाएगा। कोरोना काल में कम से कम मानवीय संपर्क को स्थापित किया जा सके, इसके लिए ये सेंसरयुक्त घंटा लगाया गया है। यह घंटा दो से 20 सेंटीमीटर की दूरी पर हाथ रखने से ही अपने आप बजने लगता है।

राजकोट के स्थानीय निवासी हरिकृष्ण भाई अडियेचा और आशीष संचाणी ने इस सिस्टम को तैयार किया है। इस घंटे में सेंसर, सर्किट, मोटर, एलीमीटर और वायर का उपयोग किया गया है। सिविल इंजीनियर आशीष भाई ने बताया कि सेंसरयुक्त घंटे को बनाने में आठ दिन का समय लगा। आशीष ने बताया कि उनके दोस्त और सॉफ्टवेयर इंजीनियर हरिकृष्ण ने इसे बनाने के लिए प्रेरित किया और मदद भी की।

आज से देशव्यापी कोरोना वैक्सीनेशन कार्यक्रम शुरू हो चुका है और देश में कुल 3,006 केंद्रों पर स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन लगनी शुरू हो गई है। ये एक तरह से कोरोना को हराने में महत्वपूर्ण कदम है। वहीं देश में कोरोना को हराने के लिए दूसरे कदम भी उठाए जा रहे हैं। हाल ही में गुजरात के राजकोट में एक मंदिर में सेंसरयुक्त घंटा लगाया गया है।

राजकोट के विश्वकर्मा मंदिर में प्रशासन की ओर से सेंसरयुक्त घंटा लगाया गया है। जो बिना किसी स्पर्श के बज जाएगा। कोरोना काल में कम से कम मानवीय संपर्क को स्थापित किया जा सके, इसके लिए ये सेंसरयुक्त घंटा लगाया गया है। यह घंटा दो से 20 सेंटीमीटर की दूरी पर हाथ रखने से ही अपने आप बजने लगता है।

राजकोट के स्थानीय निवासी हरिकृष्ण भाई अडियेचा और आशीष संचाणी ने इस सिस्टम को तैयार किया है। इस घंटे में सेंसर, सर्किट, मोटर, एलीमीटर और वायर का उपयोग किया गया है। सिविल इंजीनियर आशीष भाई ने बताया कि सेंसरयुक्त घंटे को बनाने में आठ दिन का समय लगा। आशीष ने बताया कि उनके दोस्त और सॉफ्टवेयर इंजीनियर हरिकृष्ण ने इसे बनाने के लिए प्रेरित किया और मदद भी की।


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