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कैपिटल हिल पर हमले से बढ़ गया है ट्रंप के कट्टर समर्थकों का हौसला

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर महाभियोग लगाने की तमाम चर्चाओं के बीच जमीनी स्तर से आ रही खबरों से राजनीतिक विश्लेषक चिंतित हैं। कैपिटल हिल (संसद भवन) पर हमले के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी इस हमले को उकसाने के आरोप में ट्रंप पर महाभियोग लगाने की तैयारी में है। इस कदम के जरिए पार्टी एक मिसाल कायम करना चाहती है। साथ ही उसकी सोच यह है कि अगर महाभियोग प्रस्ताव पारित हो गया, तो ट्रंप पर भविष्य में चुनाव लड़ने पर रोक लग जाएगी। लेकिन खबरों के मुताबिक इन कोशिशों से ट्रंप समर्थक जमातों का हौसला नहीं टूट रहा है।  

टीवी चैनल अल-अजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक धुर दक्षिणपंथी और श्वेत राष्ट्रवादी समूहों ने कैपिटल हिल पर हमले को अपनी एक बड़ी कामयाबी माना है। दक्षिणपंथी समूहों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ और थिंक टैंक सदर्न पॉवर्टी सेंटर से जुड़े अनुसंधानकर्ता सेसी मिलर ने अल-जरीरा से कहा, ‘श्वेत राष्ट्रवादी और दूसरे धुर दक्षिणपंथी गुट कैपिटल हिल पर जो हुआ, उसे लेकर उत्सव मना रहे हैं। संसद भवन के भीतर जाकर चैंबर्स में बैठे बागियों की तस्वीरों का इस्तेमाल वे अपने प्रचार अभियान में कर रहे हैं। उनका कहना है कि उस घटना के साथ क्रांति की शुरुआत हो गई है।’

विश्लेषकों का कहना है कि धुर दक्षिणपंथी समूहों ने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप की जीत को क्रांति की शुरुआत माना था। अब चूंकि ट्रंप सत्ता में नहीं रहेंगे, तो ये गुट इस हिंसक क्रांति को शुरू करने का मौका मान रहे हैं। श्वेत राष्ट्र के समर्थक रिचर्ड स्पेंसर का नेशनल पॉलिसी इंस्टीट्यूट ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के समय से क्रांति की शुरुआत का दावा करता रहा है। कई बार स्पेंसर को टिम जियोनेट के साथ भी देखा गया, जो कैपिटल हिल पर हमले में शामिल था। स्पेंसर और ट्रंप समर्थक प्राउड बॉयज ग्रुप ने ही 2017 में शार्लोटविले शहर में ‘यूनाइट द राइट रैली’ का आयोजन किया था, जिस दौरान हिंसा भड़क उठी थी। छह जनवरी को वॉशिंगटन में हुई ट्रंप समर्थक रैली का आयोजन प्राउड बॉयज और उसके जैसे संगठनों ने ही किया था।

कैपिटल हिल पर हुए हमले के मामले में प्राउड बॉयज और कई दूसरे धुर दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उनमें प्राउड बॉयज की हवाई शाखा का संस्थापक निक ओच्स भी है, जो कैपिटल हिल के भीतर घुसे लोगों में शामिल था। उस हमले के सिलसिले में जो एक तस्वीर जो खूब चर्चित हुई, वह जेक अंजेली का है। वह बिना शर्ट पहने और सींग लगाए इस इमारत के अंदर चला गया। अंजेली लंबे समय से धुर दक्षिणपंथी विचारों को फैलाने में लगा रहा है। वह षडयंत्र की कहानियां फैलाने वाले समूह क्यूएनॉन के विचारों को फैलाने में जुटा रहा है। क्यूएनॉन ने ही ये कहानी फैलाई है कि राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप को उन उदारवादी समूहों ने धोखाधड़ी से हरा दिया, जो बच्चों का यौन शोषण करते हैं।

छह जनवरी की घटना के बाद इंटरनेट कंपनियों ने धुर दक्षिणपंथी समूहों के एप्स और उनके सोशल मीडिया अकाउंट को डिसेबल करना शुरू कर दिया है। कुछ जानकारों का कहना है कि इससे क्यूएनॉन जैसे गुटों का भविष्य अनिश्चित हो गया है। लेकिन मीडिया मैटर्स नामक संस्था से जुड़े एलेक्स कापलान ने अल-जजीरा से कहा है कि इस बारे में कोई पक्की जानकारी नहीं है कि क्यूएनॉन सिर्फ ऑनलाइन समूह है। उसने जो ऑफलाइन नुकसान पहुंचाया है, वह हम सबके सामने है।

जानकारों के मुताबिक क्यूएनॉन और प्राउड बॉयज जैसे समूहों के बीच क्या रिश्ता है, इस बारे में भी बहुत जानकारी मौजूद नहीं है। लेकिन तमाम संकेत यही बता रहे हैं कि गिरफ्तारियों और महाभियोग जैसी चर्चाओं से इन संगठनों का हौसला नहीं टूटा है। सेसी मिलर ने कहा कि ट्रंप की हार के बाद उनके बीच ‘लोकतंत्र को हिंसक तरीके से नष्ट करने’ करने की चर्चा चल रही है। इन समूहों का मानना है कि सिर्फ इसी तरीके से वे अपना मकसद हासिल कर सकते हैं। मिलर के मुताबिक हिंसक विद्रोह धुर दक्षिणपंथी गुटों का जाना-माना तरीका है। अब ऐसा लगता है कि ये सोच ट्रंप के समर्थकों में ज्यादा व्यापक रूप से घुस गई है।

दूसरे जानकारों का भी मानना है कि ऐसे गुटों को तुरंत खत्म करने का कोई तरीका नहीं है। इसलिए निकट भविष्य में हिंसा और ट्रंप समर्थक प्रदर्शनों की संभावना बनी रहेगी।

सार

छह जनवरी की घटना के बाद इंटरनेट कंपनियों ने धुर दक्षिणपंथी समूहों के एप्स और उनके सोशल मीडिया अकाउंट को डिसेबल करना शुरू कर दिया है…

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर महाभियोग लगाने की तमाम चर्चाओं के बीच जमीनी स्तर से आ रही खबरों से राजनीतिक विश्लेषक चिंतित हैं। कैपिटल हिल (संसद भवन) पर हमले के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी इस हमले को उकसाने के आरोप में ट्रंप पर महाभियोग लगाने की तैयारी में है। इस कदम के जरिए पार्टी एक मिसाल कायम करना चाहती है। साथ ही उसकी सोच यह है कि अगर महाभियोग प्रस्ताव पारित हो गया, तो ट्रंप पर भविष्य में चुनाव लड़ने पर रोक लग जाएगी। लेकिन खबरों के मुताबिक इन कोशिशों से ट्रंप समर्थक जमातों का हौसला नहीं टूट रहा है।  

टीवी चैनल अल-अजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक धुर दक्षिणपंथी और श्वेत राष्ट्रवादी समूहों ने कैपिटल हिल पर हमले को अपनी एक बड़ी कामयाबी माना है। दक्षिणपंथी समूहों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ और थिंक टैंक सदर्न पॉवर्टी सेंटर से जुड़े अनुसंधानकर्ता सेसी मिलर ने अल-जरीरा से कहा, ‘श्वेत राष्ट्रवादी और दूसरे धुर दक्षिणपंथी गुट कैपिटल हिल पर जो हुआ, उसे लेकर उत्सव मना रहे हैं। संसद भवन के भीतर जाकर चैंबर्स में बैठे बागियों की तस्वीरों का इस्तेमाल वे अपने प्रचार अभियान में कर रहे हैं। उनका कहना है कि उस घटना के साथ क्रांति की शुरुआत हो गई है।’

विश्लेषकों का कहना है कि धुर दक्षिणपंथी समूहों ने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप की जीत को क्रांति की शुरुआत माना था। अब चूंकि ट्रंप सत्ता में नहीं रहेंगे, तो ये गुट इस हिंसक क्रांति को शुरू करने का मौका मान रहे हैं। श्वेत राष्ट्र के समर्थक रिचर्ड स्पेंसर का नेशनल पॉलिसी इंस्टीट्यूट ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के समय से क्रांति की शुरुआत का दावा करता रहा है। कई बार स्पेंसर को टिम जियोनेट के साथ भी देखा गया, जो कैपिटल हिल पर हमले में शामिल था। स्पेंसर और ट्रंप समर्थक प्राउड बॉयज ग्रुप ने ही 2017 में शार्लोटविले शहर में ‘यूनाइट द राइट रैली’ का आयोजन किया था, जिस दौरान हिंसा भड़क उठी थी। छह जनवरी को वॉशिंगटन में हुई ट्रंप समर्थक रैली का आयोजन प्राउड बॉयज और उसके जैसे संगठनों ने ही किया था।

कैपिटल हिल पर हुए हमले के मामले में प्राउड बॉयज और कई दूसरे धुर दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उनमें प्राउड बॉयज की हवाई शाखा का संस्थापक निक ओच्स भी है, जो कैपिटल हिल के भीतर घुसे लोगों में शामिल था। उस हमले के सिलसिले में जो एक तस्वीर जो खूब चर्चित हुई, वह जेक अंजेली का है। वह बिना शर्ट पहने और सींग लगाए इस इमारत के अंदर चला गया। अंजेली लंबे समय से धुर दक्षिणपंथी विचारों को फैलाने में लगा रहा है। वह षडयंत्र की कहानियां फैलाने वाले समूह क्यूएनॉन के विचारों को फैलाने में जुटा रहा है। क्यूएनॉन ने ही ये कहानी फैलाई है कि राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप को उन उदारवादी समूहों ने धोखाधड़ी से हरा दिया, जो बच्चों का यौन शोषण करते हैं।

छह जनवरी की घटना के बाद इंटरनेट कंपनियों ने धुर दक्षिणपंथी समूहों के एप्स और उनके सोशल मीडिया अकाउंट को डिसेबल करना शुरू कर दिया है। कुछ जानकारों का कहना है कि इससे क्यूएनॉन जैसे गुटों का भविष्य अनिश्चित हो गया है। लेकिन मीडिया मैटर्स नामक संस्था से जुड़े एलेक्स कापलान ने अल-जजीरा से कहा है कि इस बारे में कोई पक्की जानकारी नहीं है कि क्यूएनॉन सिर्फ ऑनलाइन समूह है। उसने जो ऑफलाइन नुकसान पहुंचाया है, वह हम सबके सामने है।

जानकारों के मुताबिक क्यूएनॉन और प्राउड बॉयज जैसे समूहों के बीच क्या रिश्ता है, इस बारे में भी बहुत जानकारी मौजूद नहीं है। लेकिन तमाम संकेत यही बता रहे हैं कि गिरफ्तारियों और महाभियोग जैसी चर्चाओं से इन संगठनों का हौसला नहीं टूटा है। सेसी मिलर ने कहा कि ट्रंप की हार के बाद उनके बीच ‘लोकतंत्र को हिंसक तरीके से नष्ट करने’ करने की चर्चा चल रही है। इन समूहों का मानना है कि सिर्फ इसी तरीके से वे अपना मकसद हासिल कर सकते हैं। मिलर के मुताबिक हिंसक विद्रोह धुर दक्षिणपंथी गुटों का जाना-माना तरीका है। अब ऐसा लगता है कि ये सोच ट्रंप के समर्थकों में ज्यादा व्यापक रूप से घुस गई है।

दूसरे जानकारों का भी मानना है कि ऐसे गुटों को तुरंत खत्म करने का कोई तरीका नहीं है। इसलिए निकट भविष्य में हिंसा और ट्रंप समर्थक प्रदर्शनों की संभावना बनी रहेगी।


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