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किम जोंग ने माना, देश के आर्थिक कार्यक्रमों में मिली नाकामी, पार्टी अधिवेशन में कही अमेरिका को खुश करने वाली बातें

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उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने यह स्वीकार किया है कि उन्होंने जिन आर्थिक कार्यक्रमों की शुरुआत की थी, वे सफल नहीं हुए हैं। किम ने ये असाधारण आत्म-स्वीकृति बुधवार को सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की कांग्रेस (अधिवेशन) के उद्घाटन सत्र में की। उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने इस बात की खबर प्रमुखता से दी। इसे भी एक असाधारण बात माना जा रहा है। किम ने कहा, आर्थिक विकास की पंचवर्षीय रणनीति का समय पिछले साल पूरा हो गया। लेकिन वे कार्यक्रम अपने लक्ष्य को पाने से बहुत पीछे रह गए।

उत्तर कोरिया के नेता ने ये आत्म स्वीकृति उस समय की है, जब देश गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। जानकारों के मुताबिक उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उस पर संयुक्त राष्ट्र की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों, पिछले साल आई प्राकृतिक आपदाओं और कोरोना महामारी के कारण देश की अर्थव्यवस्था जर्जर हो गई है। कोरोना महामारी के कारण उत्तर कोरिया ने अपनी सीमाएं बंद कर दीं। बताया जाता है कि इससे देश के लोगों की आर्थिक मुसीबत और बढ़ गई।

इसके बावजूद किम ने अपने भाषण में आत्म-निर्भरता की नीति पर चलते रहने का संकल्प जताया। उन्होंने ये संदेश देने की कोशिश की कि देश उसके सामने पेश आई चुनौतियों से उबर रहा है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक यही संदेश देने के लिए सरकारी मीडिया पर बैठक की कई तस्वीरें जारी की गईं, जिनमें किम और वहां मौजूद दूसरे लोगों को बिना मास्क पहने दिखाया गया। उत्तर कोरिया ने दावा किया था कि उसके यहां कोरोना संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है। लेकिन जापान और अमेरिका के अधिकारियों ने इस दावे को संदिग्ध बताया था।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि 2011 में जब किम ने देश की सत्ता संभाली थी, तब से देश की आर्थिक हालत लगातार बिगड़ती गई है। सीमा बंद करने के बाद इसमें तेजी से गिरावट आई, क्योंकि इस कारण चीन के व्यापारियों से देश का संपर्क टूट गया। साथ ही चीन से आने वाली सहायता भी रुक गई।

बुधवार के भाषण में किम ने परमाणु शब्द का जिक्र नहीं किया। उन्होंने सिर्फ यह कहा कि उत्तर कोरिया ने ऐसी मजबूत व्यवस्था की है, जिससे “मातृभूमि की सुरक्षा की गारंटी” होती है। जानकारों के मुताबिक उनका इशारा उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम की तरफ ही था। जब अमेरिका में सत्ता परिवर्तन होने वाला है, उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की नजर है। विश्लेषकों के मुताबिक संभवतः इसीलिए किम ने इस मुद्दे की ज्यादा चर्चा नहीं की।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किम के साथ तीन बार मुलाकात की थी। 2017 में मुलाकातों का ये सिलसिला शुरू होने के बाद उत्तर कोरिया ने कोई परमाणु या लंबी दूरी की मिसाइल का परीक्षण नहीं किया है। हालांकि ट्रंप-किम वार्ता में कोई खास प्रगति नहीं हुई, लेकिन पर्यवेक्षकों के मुताबिक नवंबर में हुए अमेरिकी चुनाव में किम की सहानुभूति ट्रंप के साथ थी। इसलिए कि ट्रंप की अनिश्चित और अस्थिर नीतियों को उत्तर कोरिया अपने माफिक पाता था।

अब अमेरिका में जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने से पहले उत्तर कोरिया उनकी नीति को लेकर अनुमान लगाने के दौर में है। इसलिए अभी किम ने उन मुद्दों पर चुप रहना बेहतर समझा, जिससे पहले से तनाव का माहौल बन सकता था। बाइडन और किम के बीच कुछ महीने पहले जुबानी जंग हुई थी। तब किम ने बाइडन को कुत्ता कह दिया था। इसके जवाब में बाइडन ने किम को ठग कहा था।

लेकिन अब ऐसे संकेत हैं कि किम माहौल सुधारना चाहते हैं। पिछले महीने अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल में खबर छपी थी कि किम ने यूरोप के एक नेता से संपर्क कर कहा कि वे अमेरिका से बेहतर रिश्ते रखना चाहते हैं। चुनाव जीतने के बाद बाइडन ने कहा था कि वे उत्तर कोरिया के मामले में “सिद्धांतनिष्ठ कूटनीति” का सहारा लेंगे।

सार

किम ने अपने भाषण में आत्म-निर्भरता की नीति पर चलते रहने का संकल्प जताया। उन्होंने ये संदेश देने की कोशिश की कि देश उसके सामने पेश आई चुनौतियों से उबर रहा है…

विस्तार

उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने यह स्वीकार किया है कि उन्होंने जिन आर्थिक कार्यक्रमों की शुरुआत की थी, वे सफल नहीं हुए हैं। किम ने ये असाधारण आत्म-स्वीकृति बुधवार को सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की कांग्रेस (अधिवेशन) के उद्घाटन सत्र में की। उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने इस बात की खबर प्रमुखता से दी। इसे भी एक असाधारण बात माना जा रहा है। किम ने कहा, आर्थिक विकास की पंचवर्षीय रणनीति का समय पिछले साल पूरा हो गया। लेकिन वे कार्यक्रम अपने लक्ष्य को पाने से बहुत पीछे रह गए।

उत्तर कोरिया के नेता ने ये आत्म स्वीकृति उस समय की है, जब देश गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। जानकारों के मुताबिक उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उस पर संयुक्त राष्ट्र की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों, पिछले साल आई प्राकृतिक आपदाओं और कोरोना महामारी के कारण देश की अर्थव्यवस्था जर्जर हो गई है। कोरोना महामारी के कारण उत्तर कोरिया ने अपनी सीमाएं बंद कर दीं। बताया जाता है कि इससे देश के लोगों की आर्थिक मुसीबत और बढ़ गई।

इसके बावजूद किम ने अपने भाषण में आत्म-निर्भरता की नीति पर चलते रहने का संकल्प जताया। उन्होंने ये संदेश देने की कोशिश की कि देश उसके सामने पेश आई चुनौतियों से उबर रहा है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक यही संदेश देने के लिए सरकारी मीडिया पर बैठक की कई तस्वीरें जारी की गईं, जिनमें किम और वहां मौजूद दूसरे लोगों को बिना मास्क पहने दिखाया गया। उत्तर कोरिया ने दावा किया था कि उसके यहां कोरोना संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है। लेकिन जापान और अमेरिका के अधिकारियों ने इस दावे को संदिग्ध बताया था।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि 2011 में जब किम ने देश की सत्ता संभाली थी, तब से देश की आर्थिक हालत लगातार बिगड़ती गई है। सीमा बंद करने के बाद इसमें तेजी से गिरावट आई, क्योंकि इस कारण चीन के व्यापारियों से देश का संपर्क टूट गया। साथ ही चीन से आने वाली सहायता भी रुक गई।

बुधवार के भाषण में किम ने परमाणु शब्द का जिक्र नहीं किया। उन्होंने सिर्फ यह कहा कि उत्तर कोरिया ने ऐसी मजबूत व्यवस्था की है, जिससे “मातृभूमि की सुरक्षा की गारंटी” होती है। जानकारों के मुताबिक उनका इशारा उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम की तरफ ही था। जब अमेरिका में सत्ता परिवर्तन होने वाला है, उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की नजर है। विश्लेषकों के मुताबिक संभवतः इसीलिए किम ने इस मुद्दे की ज्यादा चर्चा नहीं की।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किम के साथ तीन बार मुलाकात की थी। 2017 में मुलाकातों का ये सिलसिला शुरू होने के बाद उत्तर कोरिया ने कोई परमाणु या लंबी दूरी की मिसाइल का परीक्षण नहीं किया है। हालांकि ट्रंप-किम वार्ता में कोई खास प्रगति नहीं हुई, लेकिन पर्यवेक्षकों के मुताबिक नवंबर में हुए अमेरिकी चुनाव में किम की सहानुभूति ट्रंप के साथ थी। इसलिए कि ट्रंप की अनिश्चित और अस्थिर नीतियों को उत्तर कोरिया अपने माफिक पाता था।

अब अमेरिका में जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने से पहले उत्तर कोरिया उनकी नीति को लेकर अनुमान लगाने के दौर में है। इसलिए अभी किम ने उन मुद्दों पर चुप रहना बेहतर समझा, जिससे पहले से तनाव का माहौल बन सकता था। बाइडन और किम के बीच कुछ महीने पहले जुबानी जंग हुई थी। तब किम ने बाइडन को कुत्ता कह दिया था। इसके जवाब में बाइडन ने किम को ठग कहा था।

लेकिन अब ऐसे संकेत हैं कि किम माहौल सुधारना चाहते हैं। पिछले महीने अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल में खबर छपी थी कि किम ने यूरोप के एक नेता से संपर्क कर कहा कि वे अमेरिका से बेहतर रिश्ते रखना चाहते हैं। चुनाव जीतने के बाद बाइडन ने कहा था कि वे उत्तर कोरिया के मामले में “सिद्धांतनिष्ठ कूटनीति” का सहारा लेंगे।


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