Uttar Pradesh

काशी विश्वनाथ धाम में जमीन की बाधाएं दूर, भूकंप से बचाने को इस तकनीक का हो रहा उपयोग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी, Updated Sun, 17 Jan 2021 12:31 AM IST

श्री काशी विश्वनाथ धाम में जमीन की सारी बाधाएं दूर हो चुकी हैं। नजूल की जमीन का विवाद समाप्त होने के साथ ही काम में तेजी आ गई है। नजूल की दोनों जमीन पर एसटीपी और मल्टीपरपज हाल का नक्शा प्रस्तावित है।  

श्री काशी विश्वनाथ धाम का काम 15 जनवरी 2019 से आरंभ हुआ है। साल भर बीतने के बाद स्ट्रक्चर का 35 फीसदी काम पूरा हो गया है। बीच में कोरोना संक्रमण के कारण काम बंद हो गया था। दोबारा जब काम शुरू हुआ तो धाम के किनारे खड़ी की गईं टिन की ऊंची दीवारों के अंदर भारी-भरकम सुरक्षा के बीच कारीगर, इंजीनियर और मजदूर 5.3 लाख वर्ग फीट में 24 घंटे लगातार धाम को आकार देने में लगे हैं। तीन शिफ्ट में मजदूर निर्माण कार्य में लगे हैं।  

भूकंप और भूस्खलन की स्थिति में भी मुख्य मंदिर परिसर की दीवार की मजबूती को बनाए रखने के लिए पीतल की प्लेटें प्रयोग में लाई जा रही हैं। वी आकार की छह इंच चौड़ी और 18 इंच लंबी छह सौ ग्राम वजन की पीतल की प्लेटों को पत्थरों से जोड़ने के लिए 12 इंच की गुल्ली लगाई जा रही है। गुल्ली का वजन भी चार सौ ग्राम केआसपास है। विशेष प्रकार के केमिकल लेपाक्स अल्ट्राफिक्स का इस्तेमाल पीतल और पत्थरों के बीच खाली जगह को भरने के लिए किया जा रहा है।

 


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arvind007

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