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एसीएफई रिपोर्ट: भारत में कार्पोरेट फ्रॉड सबसे ज्यादा, कंपनी के मालिक और मैनेजर होते हैं ज्यादा लिप्त

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सामान्य तौर पर यह समझा जाता है कि किसी कंपनी के  छोटे कर्मचारी सबसे ज्यादा पेशेगत फ्रॉड करते हैं, लेकिन अमेरिका स्थित कंपनी एसीएफई की रिपोर्ट मानें तो कर्मचारियों से ज्यादा कंपनी के मालिक और मैनेजर सबसे ज्यादा फ्रॉड्स को अंजाम दे रहे हैं। इससे कंपनी और देश को प्रति वर्ष भारी आर्थिक नुकसान होता है। भारत के लिए यह और भी परेशानी की बात है कि यहां विश्व में सबसे ज्यादा कॉर्पोरेट फ्रॉड्स को अंजाम दिया जा रहा है और यह 90 देशों की सूची में सबसे ऊपर है। मजे की बात है कि इस तरह के फ्रॉड्स का सबसे ज्यादा खुलासा किसी जांच या ऑडिट रिपोर्ट में नहीं, बल्कि कंपनी के कर्मचारियों से मिल रही टिप्स के जरिए ही हो रहा है।

दि एसोसिएशन ऑफ सर्टिफाइड फ्रॉड एक्जामिनर्स के हालिया अध्ययन के अनुसार कुल कॉर्पोरेट फ्रॉड्स का केवल 23 प्रतिशत हिस्सा कंपनी के छोटे या मंझले स्तर के कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है, जबकि सबसे ज्यादा 42 प्रतिशत फ्रॉड्स कंपनी के मैनेजर स्तर के कर्मचारियों के द्वारा किया जा रहा है। सामान्य कर्मचारियों के फ्रॉड्स से कंपनी को औसतन 28 हजार डॉलर का नुकसान हो रहा है, वहीं मैनेजर स्तर के कर्मचारियों के फ्रॉड्स से कंपनियों को औसतन 1.17 लाख डॉलर का नुकसान हो रहा है।

31 फीसदी मामलों में मालिक व सीईओ लिप्त
वहीं, वर्ष 2020 में अनेक कंपनियों के मालिक या सीईओ स्तर के लोग भी कॉर्पोरेट फ्रॉड को अंजाम देते हुए पाए गए हैं। 31 प्रतिशत मामलों में कंपनी मालिक या सीईओ भी फ्रॉड में शामिल पाए गए हैं, लेकिन शीर्ष स्तर पर होने वाले इस भ्रष्टाचार में देश को सबसे ज्यादा औसतन 5.75 लाख डॉलर का नुकसान हो रहा है।

भारत में सबसे ज्यादा, नेपाल में सबसे कम
दक्षिण एशियाई देशों में भारत में सबसे ज्यादा फ्रॉड्स को अंजाम दिया जा रहा है। भारत में सबसे ज्यादा 77 बड़े कॉर्पोरेट फ्रॉड्स रिपोर्ट किए गए, जबकि पड़ोसी देश पाकिस्तान में 15, बांग्लादेश में चार, अफगानिस्तान और श्रीलंका में तीन-तीन और नेपाल में केवल एक कॉर्पोरेट फ्रॉड होने का पता चला है।

इस तरह का फ्रॉड सबसे ज्यादा
कंपनी की खरीदी-बिक्री से जुड़ी किसी चीज के मूल्यांकन में धोखाधड़ी कर सबसे ज्यादा फ्रॉड्स को अंजाम दिया जा रहा है। यानी किसी ज्यादा कीमत की वस्तु को संबंंधित अधिकारियों से मिलीभगत कर बेहद कम कीमत की बताकर खरीदी-बिक्री कर दी जाती है। इस तरह कंपनी या देश को सबसे ज्यादा चूना लगाया जा रहा है। इस तरह टैक्स चुकाने और विदेशों में व्यापार के बाद प्रोत्साहन के रूप में वापस मिलने वाले रिटर्न टैक्स के मामले भी शामिल हैं। 

कई ऐसी कंपनियों के फ्रॉड्स भी सामने आए हैं जहां कंपनियों ने फर्जी बिलों के जरिए केंद्र सरकार को विदेश से व्यापार दिखाकर सरकार से मिलने वाली सहायता प्राप्त कर ली, लेकिन बाद में जांच में पता चला कि कंपनी ने इस तरह का कोई व्यापार विदेशी कंपनियों से किया ही नहीं गया था।

महिलाओं से ज्यादा पुरुष शामिल
इन अपराधों में सबसे ज्यादा 1391 मामलों में पुरुष और 543 मामलों में महिलाएं शामिल पाई गई हैं। अगर अपराधियों के उम्र के आधार पर आकलन करें तो इनमें सबसे ज्यादा 30 से 45 वर्ष के आयु वर्ग के लोग शामिल पाए गए हैं। 25 वर्ष तक की आयु के केवल 81 और 60 वर्ष से ऊपर के केवल 60 लोग ही इस तरह के अपराधों में शामिल पाए गए।

टिप्स से हो रहा ज्यादा खुलासा
रिपोर्ट की मानें तो इस तरह के कॉर्पोरेट्स का सबसे ज्यादा खुलासा इससे संबंधित मिलने वाली टिप्स के जरिए हो रहा है। वर्ष 2020 में सबसे ज्यादा 869 मामलों में टिप्स के जरिए इन फ्रॉड्स का खुलासा हुआ जबकि कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट में केवल 291 मामलों का ही पता चला। कंपनी मैनेजमेंट के रिव्यू में इस तरह के फ्रॉड्स के 240 मामलों का पता चला तो 103 मामलों का अचानक संयोगवश खुलासा हो गया। कंपनियों के आईटी कंट्रोल सिस्टम इस तरह के फ्रॉड्स का खुलासा करने में बहुत सक्षम नहीं पाए गए और उन्होंने कॉर्पोरेट फ्रॉड्स के केवल 33 मामलों का ही खुलासा किया।  

सार

  • acfe की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में सबसे ज्यादा भारत में होते हैं कॉर्पोरेट फ्रॉड
  • इनसे कंपनी और देश को प्रति वर्ष होता है करोड़ों का नुकसान

विस्तार

सामान्य तौर पर यह समझा जाता है कि किसी कंपनी के  छोटे कर्मचारी सबसे ज्यादा पेशेगत फ्रॉड करते हैं, लेकिन अमेरिका स्थित कंपनी एसीएफई की रिपोर्ट मानें तो कर्मचारियों से ज्यादा कंपनी के मालिक और मैनेजर सबसे ज्यादा फ्रॉड्स को अंजाम दे रहे हैं। इससे कंपनी और देश को प्रति वर्ष भारी आर्थिक नुकसान होता है। भारत के लिए यह और भी परेशानी की बात है कि यहां विश्व में सबसे ज्यादा कॉर्पोरेट फ्रॉड्स को अंजाम दिया जा रहा है और यह 90 देशों की सूची में सबसे ऊपर है। मजे की बात है कि इस तरह के फ्रॉड्स का सबसे ज्यादा खुलासा किसी जांच या ऑडिट रिपोर्ट में नहीं, बल्कि कंपनी के कर्मचारियों से मिल रही टिप्स के जरिए ही हो रहा है।

दि एसोसिएशन ऑफ सर्टिफाइड फ्रॉड एक्जामिनर्स के हालिया अध्ययन के अनुसार कुल कॉर्पोरेट फ्रॉड्स का केवल 23 प्रतिशत हिस्सा कंपनी के छोटे या मंझले स्तर के कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है, जबकि सबसे ज्यादा 42 प्रतिशत फ्रॉड्स कंपनी के मैनेजर स्तर के कर्मचारियों के द्वारा किया जा रहा है। सामान्य कर्मचारियों के फ्रॉड्स से कंपनी को औसतन 28 हजार डॉलर का नुकसान हो रहा है, वहीं मैनेजर स्तर के कर्मचारियों के फ्रॉड्स से कंपनियों को औसतन 1.17 लाख डॉलर का नुकसान हो रहा है।

31 फीसदी मामलों में मालिक व सीईओ लिप्त

वहीं, वर्ष 2020 में अनेक कंपनियों के मालिक या सीईओ स्तर के लोग भी कॉर्पोरेट फ्रॉड को अंजाम देते हुए पाए गए हैं। 31 प्रतिशत मामलों में कंपनी मालिक या सीईओ भी फ्रॉड में शामिल पाए गए हैं, लेकिन शीर्ष स्तर पर होने वाले इस भ्रष्टाचार में देश को सबसे ज्यादा औसतन 5.75 लाख डॉलर का नुकसान हो रहा है।

भारत में सबसे ज्यादा, नेपाल में सबसे कम

दक्षिण एशियाई देशों में भारत में सबसे ज्यादा फ्रॉड्स को अंजाम दिया जा रहा है। भारत में सबसे ज्यादा 77 बड़े कॉर्पोरेट फ्रॉड्स रिपोर्ट किए गए, जबकि पड़ोसी देश पाकिस्तान में 15, बांग्लादेश में चार, अफगानिस्तान और श्रीलंका में तीन-तीन और नेपाल में केवल एक कॉर्पोरेट फ्रॉड होने का पता चला है।

इस तरह का फ्रॉड सबसे ज्यादा

कंपनी की खरीदी-बिक्री से जुड़ी किसी चीज के मूल्यांकन में धोखाधड़ी कर सबसे ज्यादा फ्रॉड्स को अंजाम दिया जा रहा है। यानी किसी ज्यादा कीमत की वस्तु को संबंंधित अधिकारियों से मिलीभगत कर बेहद कम कीमत की बताकर खरीदी-बिक्री कर दी जाती है। इस तरह कंपनी या देश को सबसे ज्यादा चूना लगाया जा रहा है। इस तरह टैक्स चुकाने और विदेशों में व्यापार के बाद प्रोत्साहन के रूप में वापस मिलने वाले रिटर्न टैक्स के मामले भी शामिल हैं। 

कई ऐसी कंपनियों के फ्रॉड्स भी सामने आए हैं जहां कंपनियों ने फर्जी बिलों के जरिए केंद्र सरकार को विदेश से व्यापार दिखाकर सरकार से मिलने वाली सहायता प्राप्त कर ली, लेकिन बाद में जांच में पता चला कि कंपनी ने इस तरह का कोई व्यापार विदेशी कंपनियों से किया ही नहीं गया था।

महिलाओं से ज्यादा पुरुष शामिल

इन अपराधों में सबसे ज्यादा 1391 मामलों में पुरुष और 543 मामलों में महिलाएं शामिल पाई गई हैं। अगर अपराधियों के उम्र के आधार पर आकलन करें तो इनमें सबसे ज्यादा 30 से 45 वर्ष के आयु वर्ग के लोग शामिल पाए गए हैं। 25 वर्ष तक की आयु के केवल 81 और 60 वर्ष से ऊपर के केवल 60 लोग ही इस तरह के अपराधों में शामिल पाए गए।

टिप्स से हो रहा ज्यादा खुलासा

रिपोर्ट की मानें तो इस तरह के कॉर्पोरेट्स का सबसे ज्यादा खुलासा इससे संबंधित मिलने वाली टिप्स के जरिए हो रहा है। वर्ष 2020 में सबसे ज्यादा 869 मामलों में टिप्स के जरिए इन फ्रॉड्स का खुलासा हुआ जबकि कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट में केवल 291 मामलों का ही पता चला। कंपनी मैनेजमेंट के रिव्यू में इस तरह के फ्रॉड्स के 240 मामलों का पता चला तो 103 मामलों का अचानक संयोगवश खुलासा हो गया। कंपनियों के आईटी कंट्रोल सिस्टम इस तरह के फ्रॉड्स का खुलासा करने में बहुत सक्षम नहीं पाए गए और उन्होंने कॉर्पोरेट फ्रॉड्स के केवल 33 मामलों का ही खुलासा किया।  


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arvind007

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