Breaking News

उत्तराखंड आपदा: गृह मंत्री शाह ने संसद में कहा- 14 वर्ग किलोमीटर के बराबर हिमस्खलन हुआ

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें

गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने व बाढ़ आपदा को लेकर लोकसभा एवं राज्यसभा में उत्तराखंड स्वत: बयान दिया। शाह ने कहा कि केंद्र सरकार व प्रधानमंत्री स्वयं राज्य के हालात पर नजर रखे हुए हैं। गृह मंत्रालय 24 घंटे स्थिति की निगरानी कर रहा है। राज्य को हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है।  उपग्रह से मिली सूचनाओं को साझा करते हुए स्पष्ट किया कि समुद्रतल से करीब 5,600 मीटर ऊपर हिमनद के मुहाने पर हिमस्खलन हुआ। यह हिमस्लखन लगभग 14 वर्ग किलोमीटर जितना बड़ा था। इसी के कारण ऋषिगंगा के निचले क्षेत्रों में अचानक बाढ़ की स्थिति बन गई। 

गृह मंत्री ने बताया कि हादसे के वक्त एनटीपीसी के प्रोजेक्ट स्थल की सुरंग से 12 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इसी तरह 15 लोगों को ऋषिगंगा परियोजना स्थल से बचाया गया। एनटीपीसी की दूसरी सुरंग में 25 से 35 लोगों के फंसे होने की आशंका है। उन्हें निकालने के प्रयास युद्ध स्तर पर चल रहे हैं। 

 

उन्होंने कहा कि सात फरवरी को सुबह लगभग दस बजे उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा की एक सहायक नदी ऋषिगंगा के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में हिम स्खलन की घटना घटी। इसके कारण ऋषिगंगा नदी के जल स्तर में एकाएक काफी वृद्धि हो गई। 

वायुसेना के पांच हेलीकॉप्टर तैनात

उन्होंने बताया कि वायुसेना के पांच हेलीकॉप्टरों को भी राहत व बचाव अभियान में लगाया गया है। सेना ने जोशीमठ में एक कंट्रोल रूम स्थापित किया है। गृह मंत्री शाह ने बताया कि आईटीबीपी ने भी एक कंट्रोल रूम बनाया है और उसके 450 जवान लापता लोगों की खोजबीन व बचाव कार्य में जुटे हैं।

एनडीआरएफ की पांच टीमें भी मौके पर जुटीं हैं। सेना की आठ टीमें भी वहां मौजूद हैं। सेना की एक मेडिकल टीम व एक एंबुलेंस भी मौके पर है। नौसेना के गोताखोरों की एक टीम को भी वहां तैनात किया गया है।  राज्य सरकार ने प्रत्येक मृतक के आश्रित को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। 

 

शाह ने बताया कि रविवार को ऋषिगंगा नदी में अचानक आई बाढ़ के कारण 13.2 मेगावाट क्षमता की एक छोटी पनबिजली परियोजना पूरी तरह बह गई और तपोवन में एनटीपीसी की निर्माणाधीन 520 मेगावाट की पनबिजली परियोजना को भी नुकसान पहुंचा।

अब निचले इलाके में बाढ़ का खतरा नहीं
शाह ने उत्तराखंड सरकार के हवाले से बताया कि अब निचले क्षेत्र में बाढ़ का कोई खतरा नहीं है। साथ ही जल स्तर में भी कमी आ रही है। केंद्र एवं राज्य की सभी एजेंसियां स्थिति पर कड़ी निगाह रखे हुए हैं।

सोमवार शाम तक 20 की मौत
शाह ने उत्तराखंड सरकार से मिली सूचना को साझा करते हुए कहा कि सोमवार की शाम पांच बजे तक इस आपदा में 20 लोगों की जान जा चुकी थी और छह लोग घायल हुए। आपदा में 197 लोग लापता हुए, जिसमें एनटीपीसी की निर्माणाधीन परियोजना के 139 कर्मचारी, ऋषिगंगा परियोजना के 46 कर्मचारी और 12 ग्रामीण शामिल हैं।

शाह ने कहा कि घटना स्थल के समीप के 13 गांवों से संपर्क बिलकुल कट गया है। इन गांवों में रसद, जरूरी सामान और दवा आदि सामग्रियों को हेलीकाप्टर के जरिये पहुंचाया जा रहा है। राज्य सरकार ने सभी स्थानों पर बिजली आपूर्ति बहाल कर दी है।

दोनों सदनों में सदस्यों ने इस आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के सम्मान में कुछ पलों तक अपने स्थानों पर खड़े होकर मौन रखा। राज्यसभा में सभापति एम वेंकैया नायडु ने दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए उम्मीद जताई कि इस आपदा के बाद चलाए जा रहे बचाव एवं राहत कार्य से लोगों को समुचित लाभ मिलेगा। वहीं, लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक घटना पर यह सभा शोक प्रकट करती है।

गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने व बाढ़ आपदा को लेकर लोकसभा एवं राज्यसभा में उत्तराखंड स्वत: बयान दिया। शाह ने कहा कि केंद्र सरकार व प्रधानमंत्री स्वयं राज्य के हालात पर नजर रखे हुए हैं। गृह मंत्रालय 24 घंटे स्थिति की निगरानी कर रहा है। राज्य को हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है।  उपग्रह से मिली सूचनाओं को साझा करते हुए स्पष्ट किया कि समुद्रतल से करीब 5,600 मीटर ऊपर हिमनद के मुहाने पर हिमस्खलन हुआ। यह हिमस्लखन लगभग 14 वर्ग किलोमीटर जितना बड़ा था। इसी के कारण ऋषिगंगा के निचले क्षेत्रों में अचानक बाढ़ की स्थिति बन गई। 

गृह मंत्री ने बताया कि हादसे के वक्त एनटीपीसी के प्रोजेक्ट स्थल की सुरंग से 12 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इसी तरह 15 लोगों को ऋषिगंगा परियोजना स्थल से बचाया गया। एनटीपीसी की दूसरी सुरंग में 25 से 35 लोगों के फंसे होने की आशंका है। उन्हें निकालने के प्रयास युद्ध स्तर पर चल रहे हैं। 

 

उन्होंने कहा कि सात फरवरी को सुबह लगभग दस बजे उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा की एक सहायक नदी ऋषिगंगा के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में हिम स्खलन की घटना घटी। इसके कारण ऋषिगंगा नदी के जल स्तर में एकाएक काफी वृद्धि हो गई। 

वायुसेना के पांच हेलीकॉप्टर तैनात

उन्होंने बताया कि वायुसेना के पांच हेलीकॉप्टरों को भी राहत व बचाव अभियान में लगाया गया है। सेना ने जोशीमठ में एक कंट्रोल रूम स्थापित किया है। गृह मंत्री शाह ने बताया कि आईटीबीपी ने भी एक कंट्रोल रूम बनाया है और उसके 450 जवान लापता लोगों की खोजबीन व बचाव कार्य में जुटे हैं।

एनडीआरएफ की पांच टीमें भी मौके पर जुटीं हैं। सेना की आठ टीमें भी वहां मौजूद हैं। सेना की एक मेडिकल टीम व एक एंबुलेंस भी मौके पर है। नौसेना के गोताखोरों की एक टीम को भी वहां तैनात किया गया है।  राज्य सरकार ने प्रत्येक मृतक के आश्रित को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। 

 


आगे पढ़ें

पनबिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा



Source link

arvind007

News Media24 is a Professional News Platform. Here we will provide you National, International, Entertainment News, Gadgets updates, etc. 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
%d bloggers like this: