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इटलीः क्या मतलब है 5-स्टार मूवमेंट में बगावत का?

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इटली में मारियो द्राघी की सरकार का समर्थन करने की वजह से 5-स्टार मूवमेंट पार्टी में विभाजन का खतरा पैदा हो गया है। इस घटनाक्रम को काफी अहम समझा जा रहा है। इसे इस बात का संकेत माना जा रहा है कि इटली में व्यवस्थावादी नेताओं और यूरोपियन यूनियन (ईयू) विरोधी भावनाएं आज भी प्रबल हैं। इटली ईयू के भीतर जर्मनी और फ्रांस के बाद तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

5-स्टार मूवमेंट व्यवस्था और ईयू विरोधी पार्टी के रूप में उभरा था। लेकिन उसके नेतृत्व ने मारियो द्राघी का समर्थन करने का फैसला किया। द्राघी टेक्नोक्रेट हैं और उन्हें शासक वर्गों की तरफ से प्रधानमंत्री पद पर थोपा गया नेता माना जाता है। द्राघी गिउसेपे कोन्ते की सरकार गिरने के बाद प्रधानमंत्री बने हैं। 5-स्टार पार्टी कोन्ते के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में शामिल थी। लेकिन सरकार गिरने के बाद उसके नेतृत्व ने पाला बदल लिया। इससे पार्टी में विद्रोह खड़ा हो गया है। गौरतलब है कि कोन्ते सरकार कोरोना महामारी के असर से निपटने के लिए बनाई गई योजना पर विवाद खड़ा होने की वजह से गिरी थी। द्राघी ने अभी इस बारे में कोई संकेत नहीं दिए हैं कि वे इस विवाद को कैसे दूर करेंगे।

द्राघी सरकार को हालांकि संसद में विश्वास मत हासिल हो गया है, लेकिन जब विश्वास मत प्रस्ताव पर मतदान हुआ तो 5-स्टार पार्टी के 31 सांसदों ने उनके खिलाफ वोट डाले। इसके अलावा 20 सांसदों ने खुद को मतदान से अलग रखा। अब पार्टी नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि उन सबको पार्टी से निकाल दिया जाएगा। लेकिन पार्टी नेतृत्व के इस रुख से पार्टी की पहचान पर सवाल खड़ा हो गया है।

5-स्टार मूवमेंट ने अपनी पहचान आउटसाइडर की बनाई थी। उसने इनसाइडर्स यानी पुरानी पार्टियों पर आपस में मिले होने और सत्ता पर एक खास तबके की पकड़ बनाए रखने में सहायक बनने के आरोप लगाए थे। द्राघी की छवि पूरी तरह इनसाइडर की है। वे यूरोपियन सेंट्रल बैंक के प्रमुख रह चुके हैं। वे उन लोगों में हैं, जिन्होंने 2011 में इटली पर ईयू की तरफ से किफायत की वे नीतियां थोपीं, जिनके खिलाफ जनता में विद्रोह की भावना फैली थी। 5-स्टार मूवमेंट इसी विद्रोह का नतीजा था। अब उसके नेतृत्व ने द्राघी का समर्थन कर दिया है। इसका मतलब यह भी है कि पार्टी उस गठबंधन का हिस्सा बन गई है, जिसमें बदनाम अरबपति नेता पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी की फोर्जा इटालिया पार्टी भी शामिल है।

विश्लेषकों का कहना है कि 5-स्टार पार्टी को लोकप्रियता वित्तीय संस्थानों की पकड़ से जनता और सरकार को मुक्ति दिलाने के वादे के कारण मिली थी। अब द्राघी की सरकार का समर्थन करके उसने अपने औचित्य पर ही प्रहार कर दिया है। जानकारों का कहना है कि 5-स्टार मूवमेंट के भीतर मूल एजेंडे को मानने वाले और हालात से समझौता करने का रुख रखने वाले गुटों के बीच खाई काफी समय से चौड़ी हो रही थी। अब दोनों गुट विभाजन की कगार पर हैं। अब बागी सांसद नई पार्टी बनाने की तैयारी कर रहे हैं।

विश्लेषकों के मुताबिक 5-स्टार मूवमेंट में विभाजन होता है, तो उससे द्राघी की सरकार के लिए तुरंत खतरा पैदा नहीं होगा। लेकिन उससे इटली में फिर से वैसे रुझान आगे बढ़ सकते हैं, जिनकी वजह से देश लगातार राजनीतिक अस्थिरता का शिकार बना हुआ है। 5-स्टार मूवमेंट को पूरे यूरोप में एक खास परिघटना की पहचान समझा जाता है। इसके उभार को ईयू की व्यवस्था को चुनौती के रूप में देखा गया था। ऐसे रुझान ग्रीस, स्पेन और कई दूसरे देशों में दिखे। ब्रिटेन में ब्रेग्जिट की चली लहर भी इसका ही परिणाम थी।

जानकारों के मुताबिक 5-स्टार मूवमेंट में बगावत इस बात का संकेत है कि इटली में जनता के स्तर पर ईयू और इस्टैब्लिशमेंट विरोधी भावना आज भी मजबूत है। द्राघी को जिस तरह प्रधानमंत्री बनाया गया, उससे ये भावना और भड़क सकती है।

इटली में मारियो द्राघी की सरकार का समर्थन करने की वजह से 5-स्टार मूवमेंट पार्टी में विभाजन का खतरा पैदा हो गया है। इस घटनाक्रम को काफी अहम समझा जा रहा है। इसे इस बात का संकेत माना जा रहा है कि इटली में व्यवस्थावादी नेताओं और यूरोपियन यूनियन (ईयू) विरोधी भावनाएं आज भी प्रबल हैं। इटली ईयू के भीतर जर्मनी और फ्रांस के बाद तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

5-स्टार मूवमेंट व्यवस्था और ईयू विरोधी पार्टी के रूप में उभरा था। लेकिन उसके नेतृत्व ने मारियो द्राघी का समर्थन करने का फैसला किया। द्राघी टेक्नोक्रेट हैं और उन्हें शासक वर्गों की तरफ से प्रधानमंत्री पद पर थोपा गया नेता माना जाता है। द्राघी गिउसेपे कोन्ते की सरकार गिरने के बाद प्रधानमंत्री बने हैं। 5-स्टार पार्टी कोन्ते के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में शामिल थी। लेकिन सरकार गिरने के बाद उसके नेतृत्व ने पाला बदल लिया। इससे पार्टी में विद्रोह खड़ा हो गया है। गौरतलब है कि कोन्ते सरकार कोरोना महामारी के असर से निपटने के लिए बनाई गई योजना पर विवाद खड़ा होने की वजह से गिरी थी। द्राघी ने अभी इस बारे में कोई संकेत नहीं दिए हैं कि वे इस विवाद को कैसे दूर करेंगे।

द्राघी सरकार को हालांकि संसद में विश्वास मत हासिल हो गया है, लेकिन जब विश्वास मत प्रस्ताव पर मतदान हुआ तो 5-स्टार पार्टी के 31 सांसदों ने उनके खिलाफ वोट डाले। इसके अलावा 20 सांसदों ने खुद को मतदान से अलग रखा। अब पार्टी नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि उन सबको पार्टी से निकाल दिया जाएगा। लेकिन पार्टी नेतृत्व के इस रुख से पार्टी की पहचान पर सवाल खड़ा हो गया है।

5-स्टार मूवमेंट ने अपनी पहचान आउटसाइडर की बनाई थी। उसने इनसाइडर्स यानी पुरानी पार्टियों पर आपस में मिले होने और सत्ता पर एक खास तबके की पकड़ बनाए रखने में सहायक बनने के आरोप लगाए थे। द्राघी की छवि पूरी तरह इनसाइडर की है। वे यूरोपियन सेंट्रल बैंक के प्रमुख रह चुके हैं। वे उन लोगों में हैं, जिन्होंने 2011 में इटली पर ईयू की तरफ से किफायत की वे नीतियां थोपीं, जिनके खिलाफ जनता में विद्रोह की भावना फैली थी। 5-स्टार मूवमेंट इसी विद्रोह का नतीजा था। अब उसके नेतृत्व ने द्राघी का समर्थन कर दिया है। इसका मतलब यह भी है कि पार्टी उस गठबंधन का हिस्सा बन गई है, जिसमें बदनाम अरबपति नेता पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी की फोर्जा इटालिया पार्टी भी शामिल है।

विश्लेषकों का कहना है कि 5-स्टार पार्टी को लोकप्रियता वित्तीय संस्थानों की पकड़ से जनता और सरकार को मुक्ति दिलाने के वादे के कारण मिली थी। अब द्राघी की सरकार का समर्थन करके उसने अपने औचित्य पर ही प्रहार कर दिया है। जानकारों का कहना है कि 5-स्टार मूवमेंट के भीतर मूल एजेंडे को मानने वाले और हालात से समझौता करने का रुख रखने वाले गुटों के बीच खाई काफी समय से चौड़ी हो रही थी। अब दोनों गुट विभाजन की कगार पर हैं। अब बागी सांसद नई पार्टी बनाने की तैयारी कर रहे हैं।

विश्लेषकों के मुताबिक 5-स्टार मूवमेंट में विभाजन होता है, तो उससे द्राघी की सरकार के लिए तुरंत खतरा पैदा नहीं होगा। लेकिन उससे इटली में फिर से वैसे रुझान आगे बढ़ सकते हैं, जिनकी वजह से देश लगातार राजनीतिक अस्थिरता का शिकार बना हुआ है। 5-स्टार मूवमेंट को पूरे यूरोप में एक खास परिघटना की पहचान समझा जाता है। इसके उभार को ईयू की व्यवस्था को चुनौती के रूप में देखा गया था। ऐसे रुझान ग्रीस, स्पेन और कई दूसरे देशों में दिखे। ब्रिटेन में ब्रेग्जिट की चली लहर भी इसका ही परिणाम थी।

जानकारों के मुताबिक 5-स्टार मूवमेंट में बगावत इस बात का संकेत है कि इटली में जनता के स्तर पर ईयू और इस्टैब्लिशमेंट विरोधी भावना आज भी मजबूत है। द्राघी को जिस तरह प्रधानमंत्री बनाया गया, उससे ये भावना और भड़क सकती है।

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