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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मॉडर्न वॉरफेयर क्षमता बढ़ाकर भारतीय सैन्य बल देंगे चुनौतियों को मुंहतोड़ जवाब

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पिछले कुछ सालों में चीन ने जमीन, हवा, पानी, अंतरिक्ष, साइबर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक युद्धपद्धति में अपने सैन्य बलों को पारंगत बनाने की कोशिश की है। लद्दाख, डोकलाम, तिब्बत क्षेत्र समेत कई मोर्चे पर चीन से मिलने वाली भावी चुनौतियों को देखते हुए भारतीय सैन्य बलों ने भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने वाले घातक ड्रोन, अल्ट्रा लेवेल पर मॉनिटरिंग में सक्षम ड्रोन के जरिए मॉडर्न वॉरफेयर में तेजी दिखानी शुरू कर दी है। सेना दिवस के मौके पर सैन्य आधुनिकीकरण के बारे में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों का कहना है कि चुनौतियों को देखते हुए तैयारियों में कई तरह बदलाव लाने की जरूरत है। अब हमारे सामने चीन और पाकिस्तान से खुली चुनौतियां आने लगी हैं, इसलिए सैन्य आधुनिकीकरण को इसे केन्द्र में रखकर आगे बढ़ाना होगा।

शुक्रवार को सेना दिवस पर भारतीय सेना ने 75 तरह के ड्रोन का लाइव प्रदर्शन किया। ये ड्रोन (मानव रहित विमान) देश में विकसित हुए हैं। इसके अलावा प्रदर्शन की कड़ी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर फोकस भी भारतीय सेना की भविष्य की चुनौतियों और जरूरत की तरफ साफ इशारा कर रहा था। वैसे भी भारतीय सेना और वायुसेना करीब एक दशक से अपने बेड़े में अमेरिका की तरह दुश्मन के ठिकाने को पलक झपकते ही सटीक वार के साथ तबाह कर देने की राह देख रही है। लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) बलवीर सिंह संधू कहते हैं कि लड़ाई तो हथियारों और हथियार के पीछे सैन्य रणनीति के सहारे होती है। इसलिए हमेशा हमारे पास अच्छी सैन्य ताकत होनी चाहिए।

सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे का संकेत समझिए

सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने सेना दिवस पर साफ कहा कि नियंत्रण रेखा के उस पार पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर से 300-400 आतंकवादी प्रशिक्षण लेने के बाद घुसपैठ की फिराक में है। बड़े दिन बाद सेना दिवस पर किसी जनरल ने पाकिस्तान से मिलने वाली इस चुनौती का संकेत दिया है। दूसरी तरफ लद्दाख में भारत और चीन के बीच में तनाव की स्थिति अभी भी बनी हुई है। 2017 में भारत और चीन के बीच में डोकलाम को लेकर तनावपूर्ण स्थिति पैदा हुई थी, लेकिन जून में भारतीय सेना और चीन के सैनिकों के बीच हुए खूनी संघर्ष ने सामरिक विशेषज्ञों को चीन के नापाक इरादे के प्रति सावधान कर दिया है। खुद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी गलवां वैली की झड़प को दोनों देशों के विश्वसनीय रिश्ते में बड़ी दरार बताया है।

इस संदर्भ में सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की एक तरह से चीन को दी गई खुली चुनौती काफी अहम है। सेनाध्यक्ष ने साफ कहा कि चीन भारतीय सेना के धैर्य की परीक्षा न ले। सेनाध्यक्ष ने बताया कि कैसे उत्तरी मोर्चे पर भारतीय सेना ने चुनौतियों (गलवां झड़प) का मुंहतोड़ जवाब दिया। जनरल ने कहा कि भारतीय सैन्य बल लद्दाख क्षेत्र में भारी ठंड और कठिन परिस्थितियों में सीना तानकर खड़े हैं।

कहां खड़े हैं भारत और चीन

ग्लोबल फायर पावर इंडेक्स के लिहाज से यह मानने में कोई गुरेज नहीं है कि सैन्य क्षमता, हथियार, उपकरण और तकनीक के मामले में चीन की क्षमता भारत से अधिक है। जमीन, हवा, समुद्र, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक हथियारों से मार करने की क्षमता उसके पास है। लेकिन इसके साथ-साथ भारत के पास कई युद्धों का अनुभव, तीन-चार दशक से आतंकवाद विरोधी गतिविधियों से जूझने के साथ-साथ अमेरिका, रूस, फ्रांस, इस्राइल जैसे देशों से ली गई विभिन्न श्रेणी की हथियार प्रणाली है। देश में ही विकसित हल्का एवं काफी अच्छी मारक क्षमता का लड़ाकू विमान तेजस है। सेना से अवकाश प्राप्त मेजर जनरल लखविंदर सिंह का कहना है कि चीन से मिल रही चुनौती का सामना भारत आसानी से कर लेगा, लेकिन जब पाकिस्तान इसके रास्ते में आएगा तो संभलकर चलने की जरूरत पड़ेगी। इसलिए भारत को अब हमेशा एक नई चुनौती से निबटने के लिए तैयार रहना चाहिए।

1962 वाला भारत नहीं है और चीन भी इसे समझता है

वायुसेना से अवकाश प्राप्त वाइस एयर मार्शल एनबी सिंह कहते हैं कि भारत अब किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। सिंह के अनुसार भारतीय सैन्य बलों को कमतर आंकना चीन की भारी भूल होगी। पूर्व वायुसेनाध्यक्ष एयरचीफ मार्शल पीवी नाइक के अनुसार भारत अब 1962 वाला नहीं है। इसे चीन भी समझता है। देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत तो कई कदम आगे निकल जाते हैं। वह साफ कहते हैं कि भारत, चीन और पाकिस्तान से मिलने वाली दोहरी चुनौती से एक साथ निबटने में सक्षम है।

हालांकि भारत के इस तरह के दावों के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने सैन्य बलों को बार-बार युद्ध के लिए तैयार रहने का निर्देश देते हैं। यह भले ही भारत के लिए युद्ध की धमकी न हो, लेकिन सामरिक विशेषज्ञ इसे लगातार जिनपिंग की अपने देश में बढ़ रही ताकत से जोड़ लेते हैं। पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल प्रकाश कटोच जैसे तमाम सैन्य जनरलों का मानना है कि शी जिनपिंग की ताकत और अधिकार क्षेत्र में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में चीन बहुआयामी चुनौतियों से निबटने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इसलिए माना जा रहा है कि आने वाले समय में उत्तराखंड के बाराहोती से लेकर लद्दाख, भूटान के सीमावर्ती क्षेत्र और अरुणाचल तक भारत चीन के हित टकराएंगे। दक्षिण चीन सागर से लेकर वन बेल्ट वन रोड की शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर भी चीन लगातार दबाव बनाने की कोशिश करेगा।

सार

  • दुश्मन के ठिकाने नष्ट करने वाले ड्रोन, रोबोट समेत अन्य पर विशेष ध्यान
  • पाकिस्तान और चीन दोनों की चुनौती के बाबत होंगे बड़े बदलाव

विस्तार

पिछले कुछ सालों में चीन ने जमीन, हवा, पानी, अंतरिक्ष, साइबर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक युद्धपद्धति में अपने सैन्य बलों को पारंगत बनाने की कोशिश की है। लद्दाख, डोकलाम, तिब्बत क्षेत्र समेत कई मोर्चे पर चीन से मिलने वाली भावी चुनौतियों को देखते हुए भारतीय सैन्य बलों ने भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने वाले घातक ड्रोन, अल्ट्रा लेवेल पर मॉनिटरिंग में सक्षम ड्रोन के जरिए मॉडर्न वॉरफेयर में तेजी दिखानी शुरू कर दी है। सेना दिवस के मौके पर सैन्य आधुनिकीकरण के बारे में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों का कहना है कि चुनौतियों को देखते हुए तैयारियों में कई तरह बदलाव लाने की जरूरत है। अब हमारे सामने चीन और पाकिस्तान से खुली चुनौतियां आने लगी हैं, इसलिए सैन्य आधुनिकीकरण को इसे केन्द्र में रखकर आगे बढ़ाना होगा।

शुक्रवार को सेना दिवस पर भारतीय सेना ने 75 तरह के ड्रोन का लाइव प्रदर्शन किया। ये ड्रोन (मानव रहित विमान) देश में विकसित हुए हैं। इसके अलावा प्रदर्शन की कड़ी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर फोकस भी भारतीय सेना की भविष्य की चुनौतियों और जरूरत की तरफ साफ इशारा कर रहा था। वैसे भी भारतीय सेना और वायुसेना करीब एक दशक से अपने बेड़े में अमेरिका की तरह दुश्मन के ठिकाने को पलक झपकते ही सटीक वार के साथ तबाह कर देने की राह देख रही है। लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) बलवीर सिंह संधू कहते हैं कि लड़ाई तो हथियारों और हथियार के पीछे सैन्य रणनीति के सहारे होती है। इसलिए हमेशा हमारे पास अच्छी सैन्य ताकत होनी चाहिए।

सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे का संकेत समझिए

सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने सेना दिवस पर साफ कहा कि नियंत्रण रेखा के उस पार पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर से 300-400 आतंकवादी प्रशिक्षण लेने के बाद घुसपैठ की फिराक में है। बड़े दिन बाद सेना दिवस पर किसी जनरल ने पाकिस्तान से मिलने वाली इस चुनौती का संकेत दिया है। दूसरी तरफ लद्दाख में भारत और चीन के बीच में तनाव की स्थिति अभी भी बनी हुई है। 2017 में भारत और चीन के बीच में डोकलाम को लेकर तनावपूर्ण स्थिति पैदा हुई थी, लेकिन जून में भारतीय सेना और चीन के सैनिकों के बीच हुए खूनी संघर्ष ने सामरिक विशेषज्ञों को चीन के नापाक इरादे के प्रति सावधान कर दिया है। खुद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी गलवां वैली की झड़प को दोनों देशों के विश्वसनीय रिश्ते में बड़ी दरार बताया है।

इस संदर्भ में सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की एक तरह से चीन को दी गई खुली चुनौती काफी अहम है। सेनाध्यक्ष ने साफ कहा कि चीन भारतीय सेना के धैर्य की परीक्षा न ले। सेनाध्यक्ष ने बताया कि कैसे उत्तरी मोर्चे पर भारतीय सेना ने चुनौतियों (गलवां झड़प) का मुंहतोड़ जवाब दिया। जनरल ने कहा कि भारतीय सैन्य बल लद्दाख क्षेत्र में भारी ठंड और कठिन परिस्थितियों में सीना तानकर खड़े हैं।

कहां खड़े हैं भारत और चीन

ग्लोबल फायर पावर इंडेक्स के लिहाज से यह मानने में कोई गुरेज नहीं है कि सैन्य क्षमता, हथियार, उपकरण और तकनीक के मामले में चीन की क्षमता भारत से अधिक है। जमीन, हवा, समुद्र, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक हथियारों से मार करने की क्षमता उसके पास है। लेकिन इसके साथ-साथ भारत के पास कई युद्धों का अनुभव, तीन-चार दशक से आतंकवाद विरोधी गतिविधियों से जूझने के साथ-साथ अमेरिका, रूस, फ्रांस, इस्राइल जैसे देशों से ली गई विभिन्न श्रेणी की हथियार प्रणाली है। देश में ही विकसित हल्का एवं काफी अच्छी मारक क्षमता का लड़ाकू विमान तेजस है। सेना से अवकाश प्राप्त मेजर जनरल लखविंदर सिंह का कहना है कि चीन से मिल रही चुनौती का सामना भारत आसानी से कर लेगा, लेकिन जब पाकिस्तान इसके रास्ते में आएगा तो संभलकर चलने की जरूरत पड़ेगी। इसलिए भारत को अब हमेशा एक नई चुनौती से निबटने के लिए तैयार रहना चाहिए।

1962 वाला भारत नहीं है और चीन भी इसे समझता है

वायुसेना से अवकाश प्राप्त वाइस एयर मार्शल एनबी सिंह कहते हैं कि भारत अब किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। सिंह के अनुसार भारतीय सैन्य बलों को कमतर आंकना चीन की भारी भूल होगी। पूर्व वायुसेनाध्यक्ष एयरचीफ मार्शल पीवी नाइक के अनुसार भारत अब 1962 वाला नहीं है। इसे चीन भी समझता है। देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत तो कई कदम आगे निकल जाते हैं। वह साफ कहते हैं कि भारत, चीन और पाकिस्तान से मिलने वाली दोहरी चुनौती से एक साथ निबटने में सक्षम है।

हालांकि भारत के इस तरह के दावों के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने सैन्य बलों को बार-बार युद्ध के लिए तैयार रहने का निर्देश देते हैं। यह भले ही भारत के लिए युद्ध की धमकी न हो, लेकिन सामरिक विशेषज्ञ इसे लगातार जिनपिंग की अपने देश में बढ़ रही ताकत से जोड़ लेते हैं। पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल प्रकाश कटोच जैसे तमाम सैन्य जनरलों का मानना है कि शी जिनपिंग की ताकत और अधिकार क्षेत्र में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में चीन बहुआयामी चुनौतियों से निबटने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इसलिए माना जा रहा है कि आने वाले समय में उत्तराखंड के बाराहोती से लेकर लद्दाख, भूटान के सीमावर्ती क्षेत्र और अरुणाचल तक भारत चीन के हित टकराएंगे। दक्षिण चीन सागर से लेकर वन बेल्ट वन रोड की शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर भी चीन लगातार दबाव बनाने की कोशिश करेगा।


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