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आम नहीं, खास हैं पंजाब के 7842 स्कूल, यहां मिलती है स्मार्ट एजुकेशन, इस साल 14 फीसदी अधिक दाखिले

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 15 Jan 2021 08:46 PM IST

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पंजाब के 7842 सरकारी स्कूल आम स्कूलों से कुछ अलग हैं। यहां पर पढ़ने वाले विद्यार्थी स्मार्ट एजुकेशन से रूबरू हो रहे हैं। यही कारण है कि अब निजी स्कूलों को छोड़कर अभिभावक बच्चों को पंजाब के स्मार्ट बने सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलवा रहे हैं। इस साल कोरोना काल में रिकॉर्ड विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। हर साल की अपेक्षा इस साल 14 प्रतिशत अधिक दाखिले हुए हैं।

राज्य के सरकारी स्कूलों को स्मार्ट स्कूलों में बदलने के लिए साल 2019 में स्मार्ट स्कूल नीति तैयार की थी। ये स्मार्ट स्कूल किसी भी आम स्कूल की अपेक्षा पूरी तरह अलग हैं। इन स्कूलों में शिक्षा प्रदान करने के लिए स्मार्ट क्लास रूम, डिजिटल सामग्री, सौर ऊर्जा, खेल सहूलतें, स्मार्ट वर्दी, अच्छा वातावरण सहित शैक्षिक पार्क, कलर कोडिंग, लैंडस्केपिंग मुहैया करवाई गई है। सरकारी स्कूलों को स्मार्ट स्कूल में बदलने के लिए अध्यापकों और अभिभावकों सहित सभी हिस्सेदारों की भागीदारी सुनिश्चित की गई। 

स्मार्ट स्कूल नीति के तहत स्मार्ट क्लास रूम स्थापित करने के साथ-साथ स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे, ग्रीन बोर्ड, सफेद बोर्ड, सभी विद्यार्थियों के लिए फर्नीचर मुहैया करवाया गया है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को विज्ञान और सूचना प्रौद्योगिकी की अच्छी शिक्षा के लिए प्रयोगशालाएं बनाई गई हैं। खेल सहूलतें (हर स्कूल में कम से कम 2 खेल) की व्यवस्था, अच्छे खेल मैदान बनाने, प्री-प्राइमरी और प्राइमरी विंग में झूले, खिलौने, एजुकेशनल पार्क, आकर्षित फर्नीचर, साउंड सिस्टम, स्कूल बैंड, मिड-डे-मील के लिए डाइनिंग हॉल, लर्निंग एड, लैंड स्केपिंग आदि का प्रबंध करना भी इस स्मार्ट स्कूल नीति का हिस्सा है।

पंजाब के 7842 सरकारी स्कूल आम स्कूलों से कुछ अलग हैं। यहां पर पढ़ने वाले विद्यार्थी स्मार्ट एजुकेशन से रूबरू हो रहे हैं। यही कारण है कि अब निजी स्कूलों को छोड़कर अभिभावक बच्चों को पंजाब के स्मार्ट बने सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलवा रहे हैं। इस साल कोरोना काल में रिकॉर्ड विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। हर साल की अपेक्षा इस साल 14 प्रतिशत अधिक दाखिले हुए हैं।

राज्य के सरकारी स्कूलों को स्मार्ट स्कूलों में बदलने के लिए साल 2019 में स्मार्ट स्कूल नीति तैयार की थी। ये स्मार्ट स्कूल किसी भी आम स्कूल की अपेक्षा पूरी तरह अलग हैं। इन स्कूलों में शिक्षा प्रदान करने के लिए स्मार्ट क्लास रूम, डिजिटल सामग्री, सौर ऊर्जा, खेल सहूलतें, स्मार्ट वर्दी, अच्छा वातावरण सहित शैक्षिक पार्क, कलर कोडिंग, लैंडस्केपिंग मुहैया करवाई गई है। सरकारी स्कूलों को स्मार्ट स्कूल में बदलने के लिए अध्यापकों और अभिभावकों सहित सभी हिस्सेदारों की भागीदारी सुनिश्चित की गई। 

स्मार्ट स्कूल नीति के तहत स्मार्ट क्लास रूम स्थापित करने के साथ-साथ स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे, ग्रीन बोर्ड, सफेद बोर्ड, सभी विद्यार्थियों के लिए फर्नीचर मुहैया करवाया गया है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को विज्ञान और सूचना प्रौद्योगिकी की अच्छी शिक्षा के लिए प्रयोगशालाएं बनाई गई हैं। खेल सहूलतें (हर स्कूल में कम से कम 2 खेल) की व्यवस्था, अच्छे खेल मैदान बनाने, प्री-प्राइमरी और प्राइमरी विंग में झूले, खिलौने, एजुकेशनल पार्क, आकर्षित फर्नीचर, साउंड सिस्टम, स्कूल बैंड, मिड-डे-मील के लिए डाइनिंग हॉल, लर्निंग एड, लैंड स्केपिंग आदि का प्रबंध करना भी इस स्मार्ट स्कूल नीति का हिस्सा है।

वर्ष 2019 में स्मार्ट स्कूल नीति लाई गई थी। इस नीति के तहत स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार किया गया है। आज के समय में शिक्षा के बदले स्वरूप को देखते हुए स्कूलों में बदलाव किए गए हैं। यही कारण है कि विद्यार्थी निजी स्कूलों को छोड़कर सरकारी स्कूलों में प्रवेश ले रहे हैं। इस साल रिकार्ड प्रवेश मिले हैं।  – कृष्ण कुमार, शिक्षा सचिव, पंजाब।


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