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आंदोलन में जान गंवाने वाले पंजाब के किसानों के परिवारों को पांच-पांच लाख और नौकरी देने की घोषणा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 22 Jan 2021 08:42 PM IST

कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो)
– फोटो : ANI

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कृषि कानूनों को रद्द करने से केंद्र सरकार के इनकार को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अमानवीय करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने शुक्रवार को एलान किया कि इन कानूनों के खिलाफ संघर्ष में जान गंवाने वाले पंजाब के किसानों के परिवार को पांच-पांच लाख रुपये और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी।

कैप्टन ने सवाल किया कि केंद्र सरकार इन कानूनों को रद्द करने से क्यों भाग रही है। केंद्र सरकार को यह कानून रद्द करके किसानों से बातचीत करनी चाहिए और सभी संबंधित पक्षों से सलाह के बाद नए कानून बनाने चाहिए। भारत के संविधान में भी कई बार संशोधन हो चुका है तो केंद्र सरकार यह कानून वापस न लेने पर क्यों अड़ी हुई है।

मुख्यमंत्री ने ‘कैप्टन से सवाल’ के 20वें फेसबुक लाइव सेशन के दौरान शुक्रवार को कहा कि वे किसानों के साथ हैं और उनके साथ खड़े रहेंगे। पंजाब सरकार और राज्य का हर नागरिक दिल्ली की सरहद पर बैठे किसानों की हिमायत करता है। आंदोलन में बड़ी संख्या में बुजुर्ग भी शामिल हैं जो अपने लिए नहीं, बल्कि अपने बच्चों और पोते-पोतियों के भविष्य के लिए वहां डटे हुए हैं।
 

कृषि जैसे प्रांतीय मामले में केंद्र ने दखल क्यों दिया 
बिना किसी चर्चा के संसद में कृषि कानून पास करवाने के लिए कैप्टन ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि इसकी कीमत सारा देश चुका रहा है। उन्होंने कहा कि क्या देश में कोई संविधान है। कृषि राज्यों का विषय है इसलिए केंद्र की तरफ से प्रांतीय मामले में दखल क्यों दिया गया है। उन्होंने अकालियों और आम आदमी पार्टी (आप) को भी आड़े हाथों लिया। 

सीएम बोले- अब तक 76 किसानों की हो चुकी मौत 
मुख्यमंत्री ने बताया कि दुख की बात तो यह है कि ठंड के कारण हर दिन हम अपने किसानों को खो रहे हैं। अब तक तकरीबन 76 किसानों की मौत हो चुकी है। 

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि देश भर से सभी किसान संगठनों के नुमाइंदे दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अब पूरे देश के किसानों का है न कि अकेले पंजाब के किसानों का। कैप्टन ने तरनतारन निवासी एक व्यक्ति की इस बात पर सहमति जताई कि केंद्र अहंकारी है और कृषि कानूनों से किसानों पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे नहीं सोच रही। 

तरनतारन निवासी ने पूछा कि इस मुल्क में लोकतंत्र नहीं रहा तो कैप्टन ने जवाब दिया कि ‘आपको यह बात केंद्र सरकार को कहनी चाहिए कि भारत अब एक लोकतांत्रिक मुल्क नहीं रहा।’ मुख्यमंत्री इस बात से सहमत हुए कि जब किसान जिनके लिए यह कानून बनाए हैं अगर वही यह कानून नहीं चाहते तो इनको रद्द क्यों नहीं किया जाता। उन्होंने कहा, ‘यह मानवता के विरुद्ध है।’ उन्होंने कहा कि किसानों को 1966 से एमएसपी मिल रही है और कांग्रेस ने इसकी शुरुआत की थी। 

एनआईए के नोटिस के बारे में गृह मंत्री को लिखेंगे पत्र : कैप्टन
कुछ किसानों और किसान आंदोलन के समर्थकों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के नोटिस भेजे जाने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने न्यूजीलैंड पंजाबी वीकली के समाचार संपादक से कहा कि यह गलत कदम है और वह जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री को इस मामले में पत्र लिखेंगे। उन्होंने कहा कि यहां तक कि खालसा एड, जो वैश्विक स्तर पर काम करता है, को भी नहीं बक्शा गया। उन्होंने कहा, ‘पंजाबियों को प्यार के साथ मनाएं और मान लेंगे…. आप लाठी उठाओगे, वह भी लाठी उठा लेंगे।’

राजपुरा के गरीब बुजुर्ग से संपर्क के निर्देश 
एक शिकायत पटियाला जिले से एक पंचायत सदस्य की तरफ से उनके गांव के नजदीक बड़े स्तर पर नकली दूध के उत्पादन की थी। कैप्टन ने कहा कि  विभाग इसकी जांच करेगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पठानकोट जिले के गांव खडवार में गैर-कानूनी शराब की सप्लाई के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इसकी जांच कर दोषियों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को आदेश दे रहे हैं।  कैप्टन ने अपने कार्यालय को राजपुरा के गरीब बुजुर्ग और दिव्यांग नानक सिंह से संपर्क करने को कहा। नानक सिंह को मदद की सख्त जरूरत होने का जिक्र एक सवालकर्ता ने किया था।

कृषि कानूनों को रद्द करने से केंद्र सरकार के इनकार को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अमानवीय करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने शुक्रवार को एलान किया कि इन कानूनों के खिलाफ संघर्ष में जान गंवाने वाले पंजाब के किसानों के परिवार को पांच-पांच लाख रुपये और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी।

कैप्टन ने सवाल किया कि केंद्र सरकार इन कानूनों को रद्द करने से क्यों भाग रही है। केंद्र सरकार को यह कानून रद्द करके किसानों से बातचीत करनी चाहिए और सभी संबंधित पक्षों से सलाह के बाद नए कानून बनाने चाहिए। भारत के संविधान में भी कई बार संशोधन हो चुका है तो केंद्र सरकार यह कानून वापस न लेने पर क्यों अड़ी हुई है।

मुख्यमंत्री ने ‘कैप्टन से सवाल’ के 20वें फेसबुक लाइव सेशन के दौरान शुक्रवार को कहा कि वे किसानों के साथ हैं और उनके साथ खड़े रहेंगे। पंजाब सरकार और राज्य का हर नागरिक दिल्ली की सरहद पर बैठे किसानों की हिमायत करता है। आंदोलन में बड़ी संख्या में बुजुर्ग भी शामिल हैं जो अपने लिए नहीं, बल्कि अपने बच्चों और पोते-पोतियों के भविष्य के लिए वहां डटे हुए हैं।

 

कृषि जैसे प्रांतीय मामले में केंद्र ने दखल क्यों दिया 

बिना किसी चर्चा के संसद में कृषि कानून पास करवाने के लिए कैप्टन ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि इसकी कीमत सारा देश चुका रहा है। उन्होंने कहा कि क्या देश में कोई संविधान है। कृषि राज्यों का विषय है इसलिए केंद्र की तरफ से प्रांतीय मामले में दखल क्यों दिया गया है। उन्होंने अकालियों और आम आदमी पार्टी (आप) को भी आड़े हाथों लिया। 

सीएम बोले- अब तक 76 किसानों की हो चुकी मौत 

मुख्यमंत्री ने बताया कि दुख की बात तो यह है कि ठंड के कारण हर दिन हम अपने किसानों को खो रहे हैं। अब तक तकरीबन 76 किसानों की मौत हो चुकी है। 



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