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आंदोलनकारियों की राय के बिना ही रिपोर्ट सौंपेगी कमेटी, चार बार की गई अपील को ठुकरा चुके हैं किसान संगठन

किसान आंदोलन (फाइल फोटो)
– फोटो : amar ujala

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किसानों कानूनों से जुड़े विवाद को हल करने केलिए बनाई गई तीन सदस्यीय कमेटी आंदोलनकारी संगठनों की राय के बिना ही सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। दरअसल इस कमेटी ने आंदोलनरत संगठनों से अब तक चार बार अपनी राय देने की अपील की है। लेकिन संगठनों ने कमेटी के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया है। कमेटी अब तक 11 बैठकों के जरिए कृषि क्षेत्र से परोक्ष और प्रत्यक्ष रूप से जुड़े 500 से अधिक संस्थाओं और विशेषज्ञों की राय ले चुकी है।

कमेटी के एक सदस्य के मुताबिक, उनकी ओर से आंदोलनकारी किसान संगठनों को ही प्राथमिकता देने पर सहमति बनी थी। इसलिए 21 जनवरी की पहली बैठक में इन संगठनों की राय लेने को पहली वरीयता देने पर सहमति बनी। तब से अब तक कमेटी ने इन संगठनों से चार बार अपनी राय देने का आग्रह किया है। कमेटी ने यह भी कहा है कि अगर किसान संगठनों को कमेटी के समक्ष आने में समस्या है तो कमेटी खुद उनकी बताई जगह पर आने के लिए तैयार है। इसके बावजूद आंदोलनकारी संगठनों की ओर से कोई जवाब नहीं आया है।

उक्त सदस्य के मुताबिक कमेटी इन संगठनों से राय लेने की आखिरी कोशिश करेगी। चूंकि अगले महीने कमेटी को अपनी रिपोर्ट पेश करनी है, इसलिए इससे पहले एक बार फिर आंदोलनकारी संगठनों से राय देने का आग्रह किया जाएगा। पहले की तरह कमेटी किसी भी माध्यम से राय देने का अनुरोध करेगी। इसके अलावा एक बार फिर से अपनी ओर से संगठनों की ओर से तय जगह पर आने का प्रस्ताव देगी। अगर इसे भी आंदोलनकारी संगठनों ने ठुकरा दिया तो कमेटी के पास बिना इनकी राय के अपनी रिपोर्ट सौंपने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

जारी है राय लेने का सिलसिला
गठन के बाद कमेटी की अब तक ग्यारह बैठकें हुई है। इन बैठकों के दौरान कृषि क्षेत्र से परोक्ष या सीधे तौर पर जुड़े विशेषज्ञों, संगठनों से बातचीत की गई है। मंगलवार को कमेटी ने ऑल इंडिया किसान कॉर्डिनेशन कमेटी (एआईकेसीसी) के साथ बातचीत की। इसके अलावा कमेटी ने फिक्की, सीआईआई सहित कई आर्थिक क्षेत्र से जुड़े संस्थाओं से भी राय ली है। खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उद्योगों के प्रतिनिधियों की भी राय ली गई है। यह सिलसिला अगले तीन हफ्ते तक जारी रहेगा। भविष्य में कमेटी की योजना कुछ राज्य सरकारों की भी राय लेने की है।

सुधार को बताया जरूरी
खास बात यह है कि इन 11 बैठकों में कृषि क्षेत्र से जुड़े पक्षों ने इस क्षेत्र में सुधारों को जरूरी बताया है। इन कानूनों में सुधार के लिए कई तरह के सुझाव कमेटी को भेजे गए हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि इन 11 बैठकों में किसी भी पक्ष ने कृषि कानूनों का सीधा विरोध नहीं किया है। कमेटी की योजना अगले महीने के दूसरे-तीसरे हफ्ते में प्राप्त सुझावों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करने की है।

किसानों कानूनों से जुड़े विवाद को हल करने केलिए बनाई गई तीन सदस्यीय कमेटी आंदोलनकारी संगठनों की राय के बिना ही सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। दरअसल इस कमेटी ने आंदोलनरत संगठनों से अब तक चार बार अपनी राय देने की अपील की है। लेकिन संगठनों ने कमेटी के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया है। कमेटी अब तक 11 बैठकों के जरिए कृषि क्षेत्र से परोक्ष और प्रत्यक्ष रूप से जुड़े 500 से अधिक संस्थाओं और विशेषज्ञों की राय ले चुकी है।

कमेटी के एक सदस्य के मुताबिक, उनकी ओर से आंदोलनकारी किसान संगठनों को ही प्राथमिकता देने पर सहमति बनी थी। इसलिए 21 जनवरी की पहली बैठक में इन संगठनों की राय लेने को पहली वरीयता देने पर सहमति बनी। तब से अब तक कमेटी ने इन संगठनों से चार बार अपनी राय देने का आग्रह किया है। कमेटी ने यह भी कहा है कि अगर किसान संगठनों को कमेटी के समक्ष आने में समस्या है तो कमेटी खुद उनकी बताई जगह पर आने के लिए तैयार है। इसके बावजूद आंदोलनकारी संगठनों की ओर से कोई जवाब नहीं आया है।

उक्त सदस्य के मुताबिक कमेटी इन संगठनों से राय लेने की आखिरी कोशिश करेगी। चूंकि अगले महीने कमेटी को अपनी रिपोर्ट पेश करनी है, इसलिए इससे पहले एक बार फिर आंदोलनकारी संगठनों से राय देने का आग्रह किया जाएगा। पहले की तरह कमेटी किसी भी माध्यम से राय देने का अनुरोध करेगी। इसके अलावा एक बार फिर से अपनी ओर से संगठनों की ओर से तय जगह पर आने का प्रस्ताव देगी। अगर इसे भी आंदोलनकारी संगठनों ने ठुकरा दिया तो कमेटी के पास बिना इनकी राय के अपनी रिपोर्ट सौंपने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

जारी है राय लेने का सिलसिला

गठन के बाद कमेटी की अब तक ग्यारह बैठकें हुई है। इन बैठकों के दौरान कृषि क्षेत्र से परोक्ष या सीधे तौर पर जुड़े विशेषज्ञों, संगठनों से बातचीत की गई है। मंगलवार को कमेटी ने ऑल इंडिया किसान कॉर्डिनेशन कमेटी (एआईकेसीसी) के साथ बातचीत की। इसके अलावा कमेटी ने फिक्की, सीआईआई सहित कई आर्थिक क्षेत्र से जुड़े संस्थाओं से भी राय ली है। खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उद्योगों के प्रतिनिधियों की भी राय ली गई है। यह सिलसिला अगले तीन हफ्ते तक जारी रहेगा। भविष्य में कमेटी की योजना कुछ राज्य सरकारों की भी राय लेने की है।

सुधार को बताया जरूरी

खास बात यह है कि इन 11 बैठकों में कृषि क्षेत्र से जुड़े पक्षों ने इस क्षेत्र में सुधारों को जरूरी बताया है। इन कानूनों में सुधार के लिए कई तरह के सुझाव कमेटी को भेजे गए हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि इन 11 बैठकों में किसी भी पक्ष ने कृषि कानूनों का सीधा विरोध नहीं किया है। कमेटी की योजना अगले महीने के दूसरे-तीसरे हफ्ते में प्राप्त सुझावों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करने की है।

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