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अमेरिकी विवि ने भारतवंशी प्रोफेसर से दो साल पुराना मुकदमा निपटाया

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अमेरिका के एक विश्वविद्यालय और भारतीय मूल के प्रोफेसर के बीच एक छात्र के शोध को चोरी करने और उसे एक दवा कंपनी को बेचने के मामले में गोपनीय समझौता हो गया है। यह आरोप भारतवंशी प्रोफेसर पर लगा, जिसे लेकर विश्वविद्यालय को लाखों डॉलर का नुकसान हुआ।
 
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ऑफ मिसौरी सिस्टम और फार्मेसी के पूर्व प्राध्यापक अशीम मित्रा के बीच दो साल पुराने मुकदमे को लेकर यह समझौता हुआ है। ‘कंसास सिटी स्टार’ की एक खबर के अनुसार छात्र के चोरी हुए शोध ने ‘ड्राई आई’ के इलाज के लिए एक दवा बनाने में मदद की थी।

खबर के अनुसार विश्वविद्यालय ने आरोप लगाया कि दवा का ‘पेटेंट’ संस्थान के नाम था, प्रोफेसर मित्रा के नाम पर नहीं था। जबकि मित्रा ने इसे 15 लाख डॉलर में बेचा, जिसकी रॉयलटी से एक करोड़ डॉलर तक कमाए जा सकते है।

विश्वविद्यालय के मुताबिक, दवा की कीमत एक अरब डॉलर तक हो सकती है। हालांकि अब विश्वविद्यालय ने कहा है कि उसने मित्रा के साथ अपने मुकदमे को निपटारा कर लिया है। 

विवि ने अपना दावा खारिज किया
मिसौरी विश्वविद्यालय ने अनुसंधान के बारे में अपने दावों को न सिर्फ वापस ले लिया है बल्कि उसे खारिज भी कर दिया है। उसने स्वीकार किया कि आविष्कारकों को सही ढंग से नाम दिया गया है और पेटेंट या पेटेंट आवेदनों पर कोई भी अतिरिक्त दल आविष्कारक के रूप में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि दोनों पक्षों में हुए समझौते की शर्तों की जानकारी नहीं दी गई है।

अमेरिका के एक विश्वविद्यालय और भारतीय मूल के प्रोफेसर के बीच एक छात्र के शोध को चोरी करने और उसे एक दवा कंपनी को बेचने के मामले में गोपनीय समझौता हो गया है। यह आरोप भारतवंशी प्रोफेसर पर लगा, जिसे लेकर विश्वविद्यालय को लाखों डॉलर का नुकसान हुआ।

 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ऑफ मिसौरी सिस्टम और फार्मेसी के पूर्व प्राध्यापक अशीम मित्रा के बीच दो साल पुराने मुकदमे को लेकर यह समझौता हुआ है। ‘कंसास सिटी स्टार’ की एक खबर के अनुसार छात्र के चोरी हुए शोध ने ‘ड्राई आई’ के इलाज के लिए एक दवा बनाने में मदद की थी।

खबर के अनुसार विश्वविद्यालय ने आरोप लगाया कि दवा का ‘पेटेंट’ संस्थान के नाम था, प्रोफेसर मित्रा के नाम पर नहीं था। जबकि मित्रा ने इसे 15 लाख डॉलर में बेचा, जिसकी रॉयलटी से एक करोड़ डॉलर तक कमाए जा सकते है।

विश्वविद्यालय के मुताबिक, दवा की कीमत एक अरब डॉलर तक हो सकती है। हालांकि अब विश्वविद्यालय ने कहा है कि उसने मित्रा के साथ अपने मुकदमे को निपटारा कर लिया है। 

विवि ने अपना दावा खारिज किया

मिसौरी विश्वविद्यालय ने अनुसंधान के बारे में अपने दावों को न सिर्फ वापस ले लिया है बल्कि उसे खारिज भी कर दिया है। उसने स्वीकार किया कि आविष्कारकों को सही ढंग से नाम दिया गया है और पेटेंट या पेटेंट आवेदनों पर कोई भी अतिरिक्त दल आविष्कारक के रूप में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि दोनों पक्षों में हुए समझौते की शर्तों की जानकारी नहीं दी गई है।


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arvind007

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