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अमेरिकी कांग्रेस ने रक्षा विधेयक पर ट्रंप के वीटो को किया खारिज

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Updated Sat, 02 Jan 2021 12:24 PM IST

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अमेरिकी कांग्रेस ने एक रक्षा नीति विधेयक पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वीटो को खारिज करते हुए कार्यकाल के अंतिम दिनों में उन्हें बड़ा झटका दिया है। विशेष सत्र में रिपब्लिकन बहुल सीनेट ने उनके वीटो को आसानी से खारिज कर दिया और 740 अरब डॉलर के विधेयक को लेकर ट्रंप की आपत्ति को दरकिनार करते हुए उन्हें ऐसे समय में झटका दिया है, जब उनका कार्यकाल महज कुछ ही सप्ताह में समाप्त होने जा रहा है।

ट्रंप ने इस हफ्ते की शुरुआत में ट्विटर पर रिपब्लिकन सांसदों पर गुस्सा निकाला था और कहा था कि ‘रिपब्लिकन पार्टी का थका हुआ और कमजोर नेतृत्व’ खराब रक्षा विधेयक को पारित होने देगा। उन्होंने अपने वीटो की अवहेलना करते हुए हुई इस वोटिंग को ‘कायरतापूर्ण शर्मनाक कार्य’ करार दिया।

सीनेट ने 81-13 के बहुमत वोट से ट्रंप के वीटो को खारिज कर दिया। इस विधेयक में अमेरिकी सैनिकों के वेतन में तीन फीसदी बढ़ोतरी और रक्षा नीति से संबंधित नियम हैं जिससे सैनिकों की संख्या, नई हथियार प्रणाली, सैन्य तैयारियों और सैन्यकर्मियों से जुड़ी नीतियों और अन्य सैन्य लक्ष्यों से जुड़े फैसलों पर मुहर लगाई गई है।

इस विधेयक को मंजूरी मिलने पर ही सैन्य निर्माण समेत कई अन्य कार्यक्रम प्रभावी होते हैं। सीनेट में बहुमत के नेता (रिपब्लिकिन) मिच मैक्कोनल ने मतदान से पहले कहा कि कांग्रेस पिछले 59 वर्षों से प्रत्येक साल ‘नेशनल डिफेंस अथॉराइजेशन एक्ट’ (एनडीएए) पारित करती आई है और ‘किसी भी रास्ते से हम 60वां वार्षिक एनडीएए पूरा करेंगे और रविवार को सत्र के समापन से पहले विधेयक पारित करेंगे।’’

ट्रंप ने पिछले सप्ताह रक्षा कदमों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह सोशल मीडिया कंपनियों के लिए सीमारेखा तय करने में विफल है। ये वही सोशल मीडिया कंपनियां हैं, जिसके बारे में ट्रंप का मानना है कि उनके पुन: चुनाव के प्रचार के दौरान ये पक्षपाती रही थीं।

सोशल मीडिया और सैन्य अड्डों के नामों को लेकर चिंताओं के अलावा ट्रंप ने यह भी कहा कि यह रक्षा विधेयक विदेश नीतियों के संचालन के उनके तरीकों में, ‘खासतौर पर सैनिकों की घर वापसी के प्रयासों में’ बाधा डालता है।

ट्रंप विधेयक के उस प्रावधान का हवाला दे रहे थे जिसमें अफगानिस्तान और जर्मनी से हजारों सैनिकों की वापसी की उनकी योजना पर शर्तें रखी गई हैं। ट्रंप ने आठ अन्य विधेयकों पर भी वीटो का इस्तेमाल किया था जिससे वे विधेयक कानून नहीं बन पाए। ट्रंप के हस्ताक्षर के बिना विधेयक के कानून बनने के लिए प्रत्येक चैम्बर में दो-तिहाई मतों की जरूरत पड़ती है।

अमेरिकी कांग्रेस ने एक रक्षा नीति विधेयक पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वीटो को खारिज करते हुए कार्यकाल के अंतिम दिनों में उन्हें बड़ा झटका दिया है। विशेष सत्र में रिपब्लिकन बहुल सीनेट ने उनके वीटो को आसानी से खारिज कर दिया और 740 अरब डॉलर के विधेयक को लेकर ट्रंप की आपत्ति को दरकिनार करते हुए उन्हें ऐसे समय में झटका दिया है, जब उनका कार्यकाल महज कुछ ही सप्ताह में समाप्त होने जा रहा है।

ट्रंप ने इस हफ्ते की शुरुआत में ट्विटर पर रिपब्लिकन सांसदों पर गुस्सा निकाला था और कहा था कि ‘रिपब्लिकन पार्टी का थका हुआ और कमजोर नेतृत्व’ खराब रक्षा विधेयक को पारित होने देगा। उन्होंने अपने वीटो की अवहेलना करते हुए हुई इस वोटिंग को ‘कायरतापूर्ण शर्मनाक कार्य’ करार दिया।

सीनेट ने 81-13 के बहुमत वोट से ट्रंप के वीटो को खारिज कर दिया। इस विधेयक में अमेरिकी सैनिकों के वेतन में तीन फीसदी बढ़ोतरी और रक्षा नीति से संबंधित नियम हैं जिससे सैनिकों की संख्या, नई हथियार प्रणाली, सैन्य तैयारियों और सैन्यकर्मियों से जुड़ी नीतियों और अन्य सैन्य लक्ष्यों से जुड़े फैसलों पर मुहर लगाई गई है।

इस विधेयक को मंजूरी मिलने पर ही सैन्य निर्माण समेत कई अन्य कार्यक्रम प्रभावी होते हैं। सीनेट में बहुमत के नेता (रिपब्लिकिन) मिच मैक्कोनल ने मतदान से पहले कहा कि कांग्रेस पिछले 59 वर्षों से प्रत्येक साल ‘नेशनल डिफेंस अथॉराइजेशन एक्ट’ (एनडीएए) पारित करती आई है और ‘किसी भी रास्ते से हम 60वां वार्षिक एनडीएए पूरा करेंगे और रविवार को सत्र के समापन से पहले विधेयक पारित करेंगे।’’

ट्रंप ने पिछले सप्ताह रक्षा कदमों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह सोशल मीडिया कंपनियों के लिए सीमारेखा तय करने में विफल है। ये वही सोशल मीडिया कंपनियां हैं, जिसके बारे में ट्रंप का मानना है कि उनके पुन: चुनाव के प्रचार के दौरान ये पक्षपाती रही थीं।

सोशल मीडिया और सैन्य अड्डों के नामों को लेकर चिंताओं के अलावा ट्रंप ने यह भी कहा कि यह रक्षा विधेयक विदेश नीतियों के संचालन के उनके तरीकों में, ‘खासतौर पर सैनिकों की घर वापसी के प्रयासों में’ बाधा डालता है।

ट्रंप विधेयक के उस प्रावधान का हवाला दे रहे थे जिसमें अफगानिस्तान और जर्मनी से हजारों सैनिकों की वापसी की उनकी योजना पर शर्तें रखी गई हैं। ट्रंप ने आठ अन्य विधेयकों पर भी वीटो का इस्तेमाल किया था जिससे वे विधेयक कानून नहीं बन पाए। ट्रंप के हस्ताक्षर के बिना विधेयक के कानून बनने के लिए प्रत्येक चैम्बर में दो-तिहाई मतों की जरूरत पड़ती है।


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