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अमेरिका ने म्यांमार में दो अधिकारी किए नियुक्त, कहा- हम यहां के लोगों के साथ खड़े हैं

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन
– फोटो : ani

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म्यांमार में सैन्य तख्तापलट को लेकर सेना और जनता आमने सामने हैं। वहीं अमेरिका लगातार इस पर नजर बनाए हुए है और लगातार अपनी प्रतिक्रिया दे रहा है। एक बयान जारी कर अमेरिकी विदेश मंत्री ने म्यांमार की जनता के साथ खड़े होने की बात कही है।

वहीं, अमेरिका ने म्यांमार में दो अतिरिक्त अधिकारियों को भी तैनात किया है ताकि यहां के हालात पर नजर रखी जा सके। 

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि ‘अमेरिका उन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करता रहेगा जो म्यांमार के लोगों के साथ हिंसा कर रहे हैं। जनता अपनी लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार की बहाली की मांग कर रही हैं। हम म्यांमार के लोगों के साथ खड़े है। 

जुंटा की धमकी के बाद भी सड़कों पर उतरे हजारों लोग
म्यांमार में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सैन्य अधिकारी जुंटा की कार्रवाई की धमकी के बावजूद सोमवार को हजारों लोग यंगून में अमेरिकी दूतावास के पास जुटे और सैन्य तख्तापलट का विरोध जताया। यहां सेना ने बैरियर लगाकर न सिर्फ रास्ते रोके बल्कि करीब 20 ट्रंपों में दंगा पुलिस को भी भेजा। लेकिन प्रदर्शनकारी रुके नहीं और उन्होंने अपनी नेता आंग सान सूकी व अन्य की गिरफ्तारियों का विरोध किया।

बता दें, जुंटा ने कहा था कि यदि प्रदर्शनकारियों ने सैन्य कार्रवाई के खिलाफ आम हड़ताल की तो उन पर बल प्रयोग किया जाएगा। सरकारी प्रसारक ‘एमआरटीवी’ पर जुंटा ने रविवार देर रात हड़ताल के खिलाफ कार्रवाई करने की आधिकारिक घोषणा की थी। लेकिन यंगून के अलावा राजधानी नेपीता और मांडले शहरों में भी लोगों ने रैलियां कीं और सैन्य शासन का विरोध किया। इन प्रदर्शनों की अगुवाई करने वाले ‘नागरिक अवज्ञा आंदोलन’ के बैनर तले लोगों ने सोमवार को हड़ताल की। उल्लेखनीय है कि पिछले कई दिनों से जारी इस आंदोलन में अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है।

चिंता के बीच यूएनएचआरसी का सत्र शुरू
म्यांमार में सैन्य तख्तापलट, रूस में विपक्षी नेता एलेक्सी नवालनी की गिरफ्तारी और इथियोपिया की स्थिति को लेकर बढ़ी चिंता के बीच संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवाधिकार निकाय की वर्ष 2021 में पहली उच्च स्तरीय बैठक सोमवार को शुरू हुई। चार सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र के तहत ‘उच्च स्तरीय चर्चा’ में कई राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री शामिल होंगे। इसमें अमेरिका भी शामिल होगा जो पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में ढाई वर्ष पूर्व परिषद से हट गया था। परिषद के एजेंडे में म्यांमा में इस महीने की शुरुआत में सैन्य तख्तापलट एवं उसके बाद शुरू हुए प्रदर्शन को दबाने के लिए हिंसक कार्रवाई शीर्ष पर है।

म्यांमार में सैन्य तख्तापलट को लेकर सेना और जनता आमने सामने हैं। वहीं अमेरिका लगातार इस पर नजर बनाए हुए है और लगातार अपनी प्रतिक्रिया दे रहा है। एक बयान जारी कर अमेरिकी विदेश मंत्री ने म्यांमार की जनता के साथ खड़े होने की बात कही है।

वहीं, अमेरिका ने म्यांमार में दो अतिरिक्त अधिकारियों को भी तैनात किया है ताकि यहां के हालात पर नजर रखी जा सके। 

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि ‘अमेरिका उन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करता रहेगा जो म्यांमार के लोगों के साथ हिंसा कर रहे हैं। जनता अपनी लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार की बहाली की मांग कर रही हैं। हम म्यांमार के लोगों के साथ खड़े है। 

जुंटा की धमकी के बाद भी सड़कों पर उतरे हजारों लोग

म्यांमार में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सैन्य अधिकारी जुंटा की कार्रवाई की धमकी के बावजूद सोमवार को हजारों लोग यंगून में अमेरिकी दूतावास के पास जुटे और सैन्य तख्तापलट का विरोध जताया। यहां सेना ने बैरियर लगाकर न सिर्फ रास्ते रोके बल्कि करीब 20 ट्रंपों में दंगा पुलिस को भी भेजा। लेकिन प्रदर्शनकारी रुके नहीं और उन्होंने अपनी नेता आंग सान सूकी व अन्य की गिरफ्तारियों का विरोध किया।

बता दें, जुंटा ने कहा था कि यदि प्रदर्शनकारियों ने सैन्य कार्रवाई के खिलाफ आम हड़ताल की तो उन पर बल प्रयोग किया जाएगा। सरकारी प्रसारक ‘एमआरटीवी’ पर जुंटा ने रविवार देर रात हड़ताल के खिलाफ कार्रवाई करने की आधिकारिक घोषणा की थी। लेकिन यंगून के अलावा राजधानी नेपीता और मांडले शहरों में भी लोगों ने रैलियां कीं और सैन्य शासन का विरोध किया। इन प्रदर्शनों की अगुवाई करने वाले ‘नागरिक अवज्ञा आंदोलन’ के बैनर तले लोगों ने सोमवार को हड़ताल की। उल्लेखनीय है कि पिछले कई दिनों से जारी इस आंदोलन में अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है।

चिंता के बीच यूएनएचआरसी का सत्र शुरू

म्यांमार में सैन्य तख्तापलट, रूस में विपक्षी नेता एलेक्सी नवालनी की गिरफ्तारी और इथियोपिया की स्थिति को लेकर बढ़ी चिंता के बीच संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवाधिकार निकाय की वर्ष 2021 में पहली उच्च स्तरीय बैठक सोमवार को शुरू हुई। चार सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र के तहत ‘उच्च स्तरीय चर्चा’ में कई राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री शामिल होंगे। इसमें अमेरिका भी शामिल होगा जो पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में ढाई वर्ष पूर्व परिषद से हट गया था। परिषद के एजेंडे में म्यांमा में इस महीने की शुरुआत में सैन्य तख्तापलट एवं उसके बाद शुरू हुए प्रदर्शन को दबाने के लिए हिंसक कार्रवाई शीर्ष पर है।

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arvind007

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