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अमेरिकाः बाइडन के निर्वाचन के खिलाफ जंग में ट्रंप ने खोला आखिरी मोर्चा, समर्थकों के साथ करेंगे रैली

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अपने नव वर्ष का अवकाश बीच में ही छोड़कर वाशिंगटन लौटे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को चुनौती देने का अपना आखिरी अभियान छेड़ दिया है। उनके समर्थकों ने छह जनवरी को वाशिंगटन में डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बाइडन के निर्वाचन के खिलाफ बड़ी रैली करने का एलान किया है। ट्रंप ट्विटर और अपने दूसरे संचार माध्यमों के जरिए इस रैली को प्रचारित करने में जुट गए हैं। शनिवार सुबह (भारतीय समय के अनुसार) उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से इस संबंध में कई ट्वीट और री-ट्वीट किए।

अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव की आखिरी प्रक्रिया अमेरिकी कांग्रेस से नतीजे पर मुहर लगने के रूप में होती है। आमतौर पर यह महज औपचारिकता होती है, लेकिन इस बार ट्रंप और उनके समर्थक इसका इस्तेमाल अपने सियासी मकसद के लिए कर रहे हैं। उनका मकसद राष्ट्रपति के रूप में जो बाइडन की साख को अधिक से अधिक क्षति पहुंचाने की है। इसी क्रम में रिपब्लिकन पार्टी का डोनाल्ड ट्रंप समर्थक धड़ा निर्वाचन प्रक्रिया में आखिरी वक्त तक रोड़ा अटकाने से नहीं चूक रहा है।

अब नया पेच मिसौरी राज्य से रिपब्लिकन सीनटर जोश हॉवले ने फंसाया है। उन्होंने एलान किया है कि अगले हफ्ते जब कांग्रेस (संसद) इलेक्टोरल कॉलेज में हुए मतदान की गिनती करेगी, तब वे इस पर एतराज दर्ज कराएंगे।

अमेरिकी चुनाव प्रणाली के मुताबिक मतदाता इलेक्टोरल कॉलेज के 538 सदस्यों का चुनाव करते हैं। इलेक्टोरल कॉलेज की बैठक 14 दिसंबर को होती है, जिसमें इसके सदस्य राष्ट्रपति का चुनाव औपचारिक चुनाव करते हैं। इलेक्टोरल कॉलेज में हुए मतदान की गिनती कांग्रेस अपनी पहली बैठक में करती है। ये बैठक पांच जनवरी को होती है। आमतौर पर ये सारी प्रक्रियाएं महज रस्म-अदायगी होती हैं। लेकिन इस बार ट्रंप और उनके समर्थकों ने अभी तक अपनी हार स्वीकार नहीं की है। वे अभी भी ये धारणा बनाने में पुरजोर तरीके से जुटे हुए हैं कि डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन ने चुनाव धोखाधड़ी से जीता।

सीनेट में किसी सदस्य के इलेक्टोरल कॉलेज के मतदान की गणना पर एतराज जताने का मतलब यह होता है कि उस हालत में कांग्रेस के दोनों सदनों- सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव- में इस सवाल पर मतदान कराना होता है कि क्या कांग्रेस के सदस्य इलेक्टोरल कॉलेज के मतदान को स्वीकार करते हैं। यानी हॉवले अगर एतराज दर्ज करा देते हैं, तो छह जनवरी को दोनों सदनों में इस सवाल पर मतदान कराना होगा कि क्या वे सदन जो बाइडन की जीत को स्वीकार करते हैं। इलेक्टोरल कॉलेज में 306 सदस्यों ने बाइडन के पक्ष में वोट डाले थे और इस आधार पर वे राष्ट्रपति चुनाव जीत चुके हैं।         

जानकारों का कहना है कि हॉवले के एतराज से चुनाव नतीजा नहीं बदलेगा। इसलिए कि हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत है। सीनेट में दोनों दलों के बराबर सदस्य हैं। लेकिन कई रिपब्लिकन सदस्य यह कह चुके हैं कि वे चुनाव प्रणाली में बेवजह की रुकावट नहीं डालना चाहते। फिर भी इस एतराज से नतीजे के औपचारिक एलान में देर होगी। संभावना जताई गई है कि रिपब्लिकन पार्टी के कुछ और ट्रंप समर्थक सीनेटर एतराज दर्ज कराने में हॉवले का साथ दे सकते हैं। उनका इरादा सदन में इस मुद्दे पर यथासंभव लंबी बहस कराने का है, ताकि देश का ध्यान ट्रंप के चुनाव संबंधी दावों पर टिका रहे।  

जबकि सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के नेता एतराज दर्ज कराने के पक्ष में नहीं हैं। इसी सदन में रिपब्लिकन पार्टी के ह्विप जॉन थुन सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वे ऐसी कोशिशों के साथ नहीं हैं। इस वजह से इन दोनों को ट्रंप की नाराजगी का शिकार बनना पड़ा है। ट्रंप ने एक ट्वीट में थुन की कड़ी आलोचना की थी। गौरतलब है कि ट्रंप नेकांग्रेस पर चुनाव नतीजे को पलट देने के लिए लगातार दबाव बनाए रखा है।

विश्लेषकों के मुताबिक रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों में ट्रंप की लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि इस पार्टी के ज्यादातर नेता या सांसद खुल कर ट्रंप का विरोध करने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। ऐसे अनेक नेता हैं, जो निजी बातचीत में मानते हैं कि बाइडन वैध ढंग से जीते हैं। लेकिन सार्वजनिक बयानों में वे ट्रंप के इस दावे का समर्थन करते हैं कि बाइडन की जीत चुनावी धांधली के कारण हुई। जबकि धांधली का कोई ठोस सबूत अभी तक ट्रंप समर्थकों की तरफ से पेश नहीं किया गया है। ट्रंप की समर्थकों की याचिकाएं अदालतों में खारिज हो चुकी हैं।

इसके बावजूद हाउस के ट्रंप समर्थक रिपब्लिकन सदस्य मो ब्रुक्स ने कहा है कि उनकी पार्टी के कई सांसद छह राज्यों के चुनाव नतीजों को चुनौती देने की योजना बना रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस को चुनाव नतीजों पर बहस के लिए कम से कम 12 घंटों का समय देना होगा। विश्लेषकों का कहना है कि यह एक तरह का राजनीतिक ड्रामा होगा और ट्रंप यही चाहते हैं। ट्रंप की रणनीति अधिक से अधिक लोगों के मन में ये बात बैठाने की है कि बाइडन वैध ढंग से जीते राष्ट्रपति नहीं हैं।

सार

रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों में ट्रंप की लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि इस पार्टी के ज्यादातर नेता या सांसद खुल कर ट्रंप का विरोध करने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। ऐसे अनेक नेता हैं, जो निजी बातचीत में मानते हैं कि बाइडन वैध ढंग से जीते हैं…

विस्तार

अपने नव वर्ष का अवकाश बीच में ही छोड़कर वाशिंगटन लौटे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को चुनौती देने का अपना आखिरी अभियान छेड़ दिया है। उनके समर्थकों ने छह जनवरी को वाशिंगटन में डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बाइडन के निर्वाचन के खिलाफ बड़ी रैली करने का एलान किया है। ट्रंप ट्विटर और अपने दूसरे संचार माध्यमों के जरिए इस रैली को प्रचारित करने में जुट गए हैं। शनिवार सुबह (भारतीय समय के अनुसार) उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से इस संबंध में कई ट्वीट और री-ट्वीट किए।

अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव की आखिरी प्रक्रिया अमेरिकी कांग्रेस से नतीजे पर मुहर लगने के रूप में होती है। आमतौर पर यह महज औपचारिकता होती है, लेकिन इस बार ट्रंप और उनके समर्थक इसका इस्तेमाल अपने सियासी मकसद के लिए कर रहे हैं। उनका मकसद राष्ट्रपति के रूप में जो बाइडन की साख को अधिक से अधिक क्षति पहुंचाने की है। इसी क्रम में रिपब्लिकन पार्टी का डोनाल्ड ट्रंप समर्थक धड़ा निर्वाचन प्रक्रिया में आखिरी वक्त तक रोड़ा अटकाने से नहीं चूक रहा है।

अब नया पेच मिसौरी राज्य से रिपब्लिकन सीनटर जोश हॉवले ने फंसाया है। उन्होंने एलान किया है कि अगले हफ्ते जब कांग्रेस (संसद) इलेक्टोरल कॉलेज में हुए मतदान की गिनती करेगी, तब वे इस पर एतराज दर्ज कराएंगे।

अमेरिकी चुनाव प्रणाली के मुताबिक मतदाता इलेक्टोरल कॉलेज के 538 सदस्यों का चुनाव करते हैं। इलेक्टोरल कॉलेज की बैठक 14 दिसंबर को होती है, जिसमें इसके सदस्य राष्ट्रपति का चुनाव औपचारिक चुनाव करते हैं। इलेक्टोरल कॉलेज में हुए मतदान की गिनती कांग्रेस अपनी पहली बैठक में करती है। ये बैठक पांच जनवरी को होती है। आमतौर पर ये सारी प्रक्रियाएं महज रस्म-अदायगी होती हैं। लेकिन इस बार ट्रंप और उनके समर्थकों ने अभी तक अपनी हार स्वीकार नहीं की है। वे अभी भी ये धारणा बनाने में पुरजोर तरीके से जुटे हुए हैं कि डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन ने चुनाव धोखाधड़ी से जीता।

सीनेट में किसी सदस्य के इलेक्टोरल कॉलेज के मतदान की गणना पर एतराज जताने का मतलब यह होता है कि उस हालत में कांग्रेस के दोनों सदनों- सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव- में इस सवाल पर मतदान कराना होता है कि क्या कांग्रेस के सदस्य इलेक्टोरल कॉलेज के मतदान को स्वीकार करते हैं। यानी हॉवले अगर एतराज दर्ज करा देते हैं, तो छह जनवरी को दोनों सदनों में इस सवाल पर मतदान कराना होगा कि क्या वे सदन जो बाइडन की जीत को स्वीकार करते हैं। इलेक्टोरल कॉलेज में 306 सदस्यों ने बाइडन के पक्ष में वोट डाले थे और इस आधार पर वे राष्ट्रपति चुनाव जीत चुके हैं।         

जानकारों का कहना है कि हॉवले के एतराज से चुनाव नतीजा नहीं बदलेगा। इसलिए कि हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत है। सीनेट में दोनों दलों के बराबर सदस्य हैं। लेकिन कई रिपब्लिकन सदस्य यह कह चुके हैं कि वे चुनाव प्रणाली में बेवजह की रुकावट नहीं डालना चाहते। फिर भी इस एतराज से नतीजे के औपचारिक एलान में देर होगी। संभावना जताई गई है कि रिपब्लिकन पार्टी के कुछ और ट्रंप समर्थक सीनेटर एतराज दर्ज कराने में हॉवले का साथ दे सकते हैं। उनका इरादा सदन में इस मुद्दे पर यथासंभव लंबी बहस कराने का है, ताकि देश का ध्यान ट्रंप के चुनाव संबंधी दावों पर टिका रहे।  

जबकि सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के नेता एतराज दर्ज कराने के पक्ष में नहीं हैं। इसी सदन में रिपब्लिकन पार्टी के ह्विप जॉन थुन सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वे ऐसी कोशिशों के साथ नहीं हैं। इस वजह से इन दोनों को ट्रंप की नाराजगी का शिकार बनना पड़ा है। ट्रंप ने एक ट्वीट में थुन की कड़ी आलोचना की थी। गौरतलब है कि ट्रंप नेकांग्रेस पर चुनाव नतीजे को पलट देने के लिए लगातार दबाव बनाए रखा है।

विश्लेषकों के मुताबिक रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों में ट्रंप की लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि इस पार्टी के ज्यादातर नेता या सांसद खुल कर ट्रंप का विरोध करने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। ऐसे अनेक नेता हैं, जो निजी बातचीत में मानते हैं कि बाइडन वैध ढंग से जीते हैं। लेकिन सार्वजनिक बयानों में वे ट्रंप के इस दावे का समर्थन करते हैं कि बाइडन की जीत चुनावी धांधली के कारण हुई। जबकि धांधली का कोई ठोस सबूत अभी तक ट्रंप समर्थकों की तरफ से पेश नहीं किया गया है। ट्रंप की समर्थकों की याचिकाएं अदालतों में खारिज हो चुकी हैं।

इसके बावजूद हाउस के ट्रंप समर्थक रिपब्लिकन सदस्य मो ब्रुक्स ने कहा है कि उनकी पार्टी के कई सांसद छह राज्यों के चुनाव नतीजों को चुनौती देने की योजना बना रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस को चुनाव नतीजों पर बहस के लिए कम से कम 12 घंटों का समय देना होगा। विश्लेषकों का कहना है कि यह एक तरह का राजनीतिक ड्रामा होगा और ट्रंप यही चाहते हैं। ट्रंप की रणनीति अधिक से अधिक लोगों के मन में ये बात बैठाने की है कि बाइडन वैध ढंग से जीते राष्ट्रपति नहीं हैं।


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arvind007

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