Uttar Pradesh

अजीत हत्याकांड से सुर्खियों में आए गिरधारी को रहा है बाहुबली पूर्व सांसद का संरक्षण, दोनों हाथों से फायरिंग में है माहिर

पूर्व ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह
– फोटो : अमर उजाला

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सूबे की राजधानी लखनऊ में सरेराह मऊ जिले के पूर्व जेष्ठ ब्लाक प्रमुख अजीत सिंह की सनसनीखेज तरीके से हत्या के बाद एक लाख का इनामी बदमाश कन्हैया विश्वकर्मा उर्फ गिरधारी उर्फ डॉक्टर उर्फ डग्गर उर्फ डीएम एक बार फिर सुर्खियों में है। दोनों हाथ से असलहे से फायरिंग में माहिर शॉर्प शूटर गिरधारी को लेकर जरायम जगत की बारीकी जानकारी रखने वालों का यही कहना है कि यदि उसे सफेदपोश संरक्षण न देते तो वह आज बनारस से लेकर लखनऊ तक कानून व्यवस्था के लिए चुनौती नहीं बनता।

पूर्वांचल के एक बाहुबली पूर्व सांसद की सरपरस्ती में सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के लिए कुख्यात चोलापुर थाने के हिस्ट्रीशीटर गिरधारी का नाम वाराणसी में पहली बार वर्ष 2001 में जैतपुरा क्षेत्र में लूट के मामले में सामने आया था।

इसके बाद चोलापुर थाना अंतर्गत लखनपुर निवासी गिरधारी का नाम वाराणसी, जौनपुर, मऊ और आजमगढ़ में हत्या और अन्य गंभीर आपराधिक आरोपों के मामले में लगातार सामने आता रहा। 20 से ज्यादा गंभीर आपराधिक मुकदमों के आरोपी गिरधारी को लेकर हमेशा यही बात सामने आई कि प्रदेश में सरकार किसी की भी रही हो, जब भी पुलिस उसकी गिरफ्तारी का प्रयास करती है तो एक पूर्व सांसद अपने दमखम और सियासी रसूख का इस्तेमाल कर उसकी ढाल बन कर खड़े हो जाते हैं।

इसी वजह से गिरधारी बीते 20 साल से वाराणसी, जौनपुर, मऊ, आजमगढ़, लखनऊ और मुंबई पुलिस के लिए एक बड़ा चुनौती बना हुआ है। वारदात को अंजाम देकर लंबे समय के लिए भूमिगत हो जाने में माहिर गिरधारी अब कब पुलिस की गिरफ्त में आएगा, यह एक बड़ा सवाल है।

वाराणसी पुलिस चूक न करती तो गिरफ्त में होता गिरधारी
बुलेटप्रूफ वाहनों में चलने वालों की हत्या के लिए गिरधारी बनारस से लेकर लखनऊ तक कुख्यात हो गया है। मऊ जिले का पूर्व ब्लाक प्रमुख अजीत सिंह भी बुलेटप्रूफ वाहन से चलता था। इससे पहले 30 सितंबर 2019 को वाराणसी के सदर तहसील परिसर में बुलेटप्रूफ वाहन में बैठने जा रहे असलाहधारी सारनाथ थाने के हिस्ट्रीशीटर नीतेश सिंह उर्फ बबलू पर अंधाधुंध फायरिंग कर दिनदहाड़े हत्या की गई थी।

वारदात के तीन दिन बाद तत्कालीन क्राइम ब्रांच प्रभारी विक्रम सिंह ने तफ्तीश कर गिरधारी को चिह्नित किया और उसकी धरपकड़ का प्रयास शुरू किया। इसी बीच सफेदपोशों का ऐसा दबाव पड़ा कि विक्रम सिंह का ट्रांसफर प्रशासनिक आधार पर मैनपुरी कर दिया गया। वारदात के आठ महीने बाद वाराणसी पुलिस ने ही नीतेश की हत्या का आरोपी बताते हुए उस पर 50 हजार का इनाम घोषित किया।

फिर एडीजी जोन ने उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया। अजीत सिंह की हत्या के बाद बनारस, मऊ, आजमगढ़ से लेकर लखनऊ तक यही चर्चा रही कि नीतेश की हत्या के बाद यदि गिरधारी को पुलिस ने प्रयास कर पकड़ लिया होता तो वह आज इतनी बड़ी चुनौती न बना होता।

ब्लाक प्रमुख बनना चाहता है गिरधारी, कुंटू को एमएलसी बनना है उसके सहारे
चोलापुर क्षेत्र के लखनपुर का मूल निवासी गिरधारी मऊ के मोहम्मदाबादगोहना क्षेत्र के भदीड़ में एक अरसे से मकान बनवा रखा है। गिरधारी उस क्षेत्र में अप्रत्यक्ष तरीके से दूसरों के सहारे अक्सर सार्वजनिक आयोजन कर लोगों की मदद करता रहता है। उसकी इच्छा यही है कि वह या उसके परिवार का कोई सदस्य एक बार वहां से ब्लाक प्रमुख बन जाए।

उसके ब्लाक प्रमुख बनने की राह में अजीत सिंह एक बड़ी बाधा था। वहीं, गिरधारी का सबसे बड़ा सहयोगी और जेल में बंद 70 से ज्यादा मुकदमों का आरोपी ध्रुव सिंह उर्फ कुंटू की चाहत एमएलसी बनने की है। ऐसे में दोनों ही अपनी महत्वाकांक्षा को अंजाम तक पहुंचाने के लिए एक-दूसरे का सहारा बने हुए हैं।

सूबे की राजधानी लखनऊ में सरेराह मऊ जिले के पूर्व जेष्ठ ब्लाक प्रमुख अजीत सिंह की सनसनीखेज तरीके से हत्या के बाद एक लाख का इनामी बदमाश कन्हैया विश्वकर्मा उर्फ गिरधारी उर्फ डॉक्टर उर्फ डग्गर उर्फ डीएम एक बार फिर सुर्खियों में है। दोनों हाथ से असलहे से फायरिंग में माहिर शॉर्प शूटर गिरधारी को लेकर जरायम जगत की बारीकी जानकारी रखने वालों का यही कहना है कि यदि उसे सफेदपोश संरक्षण न देते तो वह आज बनारस से लेकर लखनऊ तक कानून व्यवस्था के लिए चुनौती नहीं बनता।

पूर्वांचल के एक बाहुबली पूर्व सांसद की सरपरस्ती में सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के लिए कुख्यात चोलापुर थाने के हिस्ट्रीशीटर गिरधारी का नाम वाराणसी में पहली बार वर्ष 2001 में जैतपुरा क्षेत्र में लूट के मामले में सामने आया था।

इसके बाद चोलापुर थाना अंतर्गत लखनपुर निवासी गिरधारी का नाम वाराणसी, जौनपुर, मऊ और आजमगढ़ में हत्या और अन्य गंभीर आपराधिक आरोपों के मामले में लगातार सामने आता रहा। 20 से ज्यादा गंभीर आपराधिक मुकदमों के आरोपी गिरधारी को लेकर हमेशा यही बात सामने आई कि प्रदेश में सरकार किसी की भी रही हो, जब भी पुलिस उसकी गिरफ्तारी का प्रयास करती है तो एक पूर्व सांसद अपने दमखम और सियासी रसूख का इस्तेमाल कर उसकी ढाल बन कर खड़े हो जाते हैं।

इसी वजह से गिरधारी बीते 20 साल से वाराणसी, जौनपुर, मऊ, आजमगढ़, लखनऊ और मुंबई पुलिस के लिए एक बड़ा चुनौती बना हुआ है। वारदात को अंजाम देकर लंबे समय के लिए भूमिगत हो जाने में माहिर गिरधारी अब कब पुलिस की गिरफ्त में आएगा, यह एक बड़ा सवाल है।


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